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दीमक बिच्छू साँप से, पाला पड़ता जाय -

मौलिक / अप्रकाशित

दीमक बिच्छू साँप से, पाला पड़ता जाय ।

पाला इस गणतंत्र ने, पाला आम नशाय ।

पाला आम नशाय, पालता ख़ास सँपोला ।

भानुमती ने पुन:, पिटारा कुनबा खोला ।

पालागन सरकार, बनाओ रविकर अहमक ।

निगलो भारत देश, मौज में रानी दीमक ।।

पाला पढ़ना= मुहावरा

पाला= पालना / जल की बूंदे जो सर्दियों में (आम ) फसल बर्बाद कर देती है /

पालागन = प्रणाम

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Comment by बृजेश नीरज on March 4, 2013 at 7:07pm

आदरणीय इस रचना के लिए मेरी बधाई और सादर प्रणाम!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 4, 2013 at 4:58pm

बहुत सुन्दर और सामयिक कुंडलिया बधाई और प्रतिक्रिया -

पालागन सरकार भी, अगर यहाँ बन जाय,

आला अफसर  सरकार, सब खुश हो जाय

 सब खुश हो जाय,डरे न बिच्छू सांप से 

  दीमक भी घबराय, चाट बनाय दीमक से,

जुगनू की रौनक देख,मस्त मंत्री के दीपक,

 बिल में सोते देख, बिच्छू सांप औ दीमक |

 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on March 4, 2013 at 12:41pm

क्या बात है आदरणीय बहुत सुंदर सुगठित कुंडलिया रची है आपने बहुत बहुत बधाई सर जी

Comment by रविकर on March 4, 2013 at 11:34am

पाला पढ़ना= मुहावरा

संशोधन-
पाला पड़ना= मुहावरा

Comment by रविकर on March 4, 2013 at 11:33am

बहुत बहुत आभार आदरेया डाक्टर साहिबा -


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 4, 2013 at 11:28am

बहुत सुन्दर सामयिक कुण्डलिया..

आपकी कारीगरी के सामने बस भौचक सी रह जाती हूँ....वाह !

हार्दिक बधाई स्वीकार करें 

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