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जय! जय! जय! बजरंग बली!

हे! बजरंगी दया तुम्हारी, सदा राम नाम गुन गाया है!
तेरी ही कृपा से मैंने, प्रभु पाद सरस रस पाया है!! जय.....
तेरे अन्तरमन में ज्यों, सिया राम छवि सुख छाई है!
मन उत्कण्ठा अविकार लिये, मैंने भी अलख जगाई है!! जय.....
कृपा करो हे! पवन पुत्र, फिर वरद तुम्हारा आया है!
तेरी ही कृपा दृष्टि से, यह सम्मान पुनः मिल पाया है!!
जय जय जय बजरंग बली, जय जय जय बजरंग बली!
जय जय जय बजरंग बली, जय जय जय बजरंग बली!!
के’पी’सत्यम/मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

 

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Comment by Yogi Saraswat on March 13, 2013 at 2:37pm

जय बजरंगबली की

Comment by ram shiromani pathak on March 13, 2013 at 1:27pm

आदरणीय केवल प्रसाद जी !जय बजरंग बली!

Comment by बृजेश नीरज on March 13, 2013 at 7:28am

जय बजरंग बली!

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on March 13, 2013 at 4:13am

आदरणीय केवल प्रसाद जी, सादर अभिवादन!

मंगलवार के दिन हनुमान जी की आराधना करने से सभी रोग दोष मुक्त हो जाते हैं!

जय जय बजरंगबली!

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