For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ओबीओ  परिवार सम,  शारद  के  सब भक्त 

’सीख-सिखाना’-अर्चना, भाव गहन हों व्यक्त

भाव गहन हों व्यक्त, आज का दिन पावन है

नदिया  धारे   धार,   जिये  नित  परिवर्तन है

तट-बंधन दृढ़ युगल, अगर कुछ बेतुक भी हो--

बहती   नदिया   मौन,  कहे  सबसे   ओबीओ..  .

ओबीओ के प्रादुर्भाव का पावन दिवस सभी सदस्यों और शुभचिंतकों के लिए मंगलमय हो.. .  हम समवेत सीखें .. ..

Views: 827

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 9, 2013 at 8:33am

आदरणीय गुरूवर जी, सादर प्रणाम!  यह ओ0बी0ओ0 मंच,  स्वयं को आपकी उक्त कुण्डलियां के समान ही पतित पावनी गंगा की भांति पावन कर रही है।  मुझे तो "ओ0बी0ओ0" अर्थात् "ओपेन बचन ओंकार" सा प्रतीत होता है। आप सभी को हार्दिक बधाई।  सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 6, 2013 at 5:52am

हार्दिक धन्यवाद आदरणीय पंकजभाईजी.. .

Comment by Pankaj Trivedi on April 5, 2013 at 11:44pm

इस पावन दिन पर ओबीओ के सभी सदस्य और एडमिन टीम को दिल से बधाई


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 4, 2013 at 10:40pm

आपका अनुमोदन हृदय से स्वीकार करता हूँ, आदरणीय प्रदीपजी.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 4, 2013 at 4:07pm

बहती नदिया मौन,  कहे सबसे ओबीओ .

आदरणीय गुरुदेव सौरभ जी 

सादर प्रणाम 

जय ओ बी ओ 

सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 3, 2013 at 5:04pm

आदरणीय जवाहरलालजी, आपका अनुमोदन ह्रुदय से स्वीकार करता हूँ.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 3, 2013 at 5:03pm

स्नेही केवल भाईजी, हार्दिक धन्यवाद.

भाई, हम सभी इस मंच के प्रति आभारी हैं कि रचना विधाओं से संबन्धित हम सबकुछ यहीं समवेत सीख रहे हैं.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 3, 2013 at 5:01pm

आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी,  सादर धन्यवाद कि आपको मेरा संवाद-प्रवाह संतुष्टिदायी लगा.

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 3, 2013 at 4:59pm

डॉ.प्राची, आपको मेरा कहा स्पष्ट लगा और छंद के भाव रुचिकर लगे यह मेरे प्रयास को सम्मान सदृश है.

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 3, 2013 at 4:57pm

भाई श्रीरामजी, हार्दिक धन्यवाद.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूसबिना कमीशन आजकल, कब होता है काम ।कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।।घास घूस…See More
10 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service