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मैं तक़रीबन बीस साल बाद विदेश से अपने शहर लौटा था। बाज़ार में घूमते हुए सहसा मेरी नज़रें सब्ज़ी का ठेला लगाए एक वृद्ध पर जा टिकीं। बहुत कोशिश के बावजूद भी मैं उसको पहचान नहीं पा रहा था। लेकिन न जाने बार-बार ऐसा क्यों लग रहा था कि मैं उसे अच्छी तरह से जानता हूँ। मेरी उत्सुकता उससे भी छुपी न रही। उसके चेहरे पर आई अचानक मुस्कान से मैं समझ गया था कि उसने मुझे पहचान लिया था। काफ़ी देर की ज़हनी कशमकश के बाद जब मैंने उसे पहचाना तो मेरे पाँव के नीचे से मानो ज़मीन खिसक गई। जब मैं विदेश गया था तो इसकी एक बहुत बड़ी आटा मिल हुआ करती थी। नौकर-चाकर आगे-पीछे घूमा करते थे। धर्म-कर्म, दान-पुण्य में सबसे अग्रणी इस दानवीर पुरुष को मैं ताऊ जी कहकर बुलाया करता था। वही आटा मिल का मालिक और आज सब्ज़ी का ठेला लगाने पर मजबूर? 
मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके पास जा पहुँचा और बहुत मुश्किल से रुँधे गले से पूछा, “ताऊ जी, ये सब कैसे हो गया?”
भरी आँखें लिए मेरे कंधे पर हाथ रख रुँधे गले से उसने उत्तर दिया, “बच्चे बड़े हो गए हैं, बेटे।”

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Comment by kanta roy on July 29, 2016 at 9:25am

बच्चों  का  बड़ा होना माता -पिता को  कमजोर  कर  जाता है .बेहद  संवेदनशील  लघुकथा है  ये  आपकी  सर  जी ,अनकही कथ्य ह्रदय  को  चीर कर  निकल  गयी  है . बधाई  आपको .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 3, 2015 at 7:59pm
दिल को छू गई। सफल लघुकथा। बधाई आदरणीय योगराज सर।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 14, 2012 at 9:21am

 मर्मस्पर्शी, दिल पर एक छाप छोड़ने वाली लघुकथा..भाव-कथ्य की निःशब्द कर देने वाली सांद्रता के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय योगराज प्रभाकर जी . सादर. 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 1:29pm

आपने लघुकथा को पसंद किया और उसके मर्म को समझा, सादर धन्यवाद डॉ बाली साहिब. 

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 21, 2012 at 1:08pm

भरी ऑंखें लिए मेरे कंधे पर हाथ रख रुंधे गले से उसने उत्तर दिया:
"बच्चे बड़े हो गए हैं बेटे !"...इन चंद शब्दों के माध्यम से आपने आज के जमाने का सच कह दिया। सच्चाई  यही है ! बहुत सुंदर लघु कथा !!बधाई ! योगराज जी !


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:04pm

आदरणीय सौरभ भाई जी, आपकी नज़र से रचना गुज़री तो ये हकीर धन्य हुया.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:04pm

धन्यवाद महिमा जी


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:04pm

हार्दिक आभार डॉ नमन दत्त जी


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:04pm

हार्दिक आभार भास्कर अग्रवाल जी


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:03pm

 दिल से आभार लता बहन.

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