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नारी तू नहीं है अबला

नारी तू नहीं है अबला
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नारी तू नहीं है अबला 

है शक्ति  स्वयं पहचान 
खुद  को शोषित  मान  ले 
फिर  कौन  करे  सम्मान 
दूषित  जग  से लड़ना होगा
खुद  ही आगे बढ़ना होगा.

रूप  धार कर  रण  चंडी का 

अधिकार  छीन  लेना होगा 

जगा  आत्म  अभिमान 

नारी तू नहीं है अबला 

है शक्ति  स्वयं पहचान 

क्या क्या नही तुझे  सब कहते 

कैसी  कैसी  फब्ती कसते 

तुझे मूढ़   अज्ञानी  कहते 

दुर्गुण आठ सदा  उर रहते 

सब मिल करते  बदनाम 

नारी तू नहीं है अबला 

है शक्ति  स्वयं पहचान 

पोखर सी ख़ामोशी  क्यों 
सागर सी  तू रह मौन
कर बुलंद अपने को तू 
आकाश झुके पूछे तू कौन
जग के इन झंझावातों में 
तुझको स्वयं संवरना होगा 
अब मत रहना अनजान 
नारी तू नहीं है अबला 

है शक्ति  स्वयं पहचान 

  • प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा 

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1090

Comment

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Comment by Vindu Babu on April 22, 2013 at 7:32pm
आदरणीय कहना चाहूंगी आज के समय कम ही लोग हैं जो आपकी तरह नारी शक्ति को प्रोत्साहित करते हैं,वरना नारी को तो...
क्या कहूं महोदय,समसामयिक घटनाएं तो वास्तव में 'पोखर जैसी खामोशी' को ही जन्म देती हैं।
सादर
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 15, 2013 at 4:21pm

आदरणीया शालिनी जी 

सादर 

स्नेह हेतु आभार 

नव वर्ष हेतु आपको भी सस्नेह शुभ कामनाएं. 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 15, 2013 at 4:20pm

आदरणीय लड़ी वाला जी 

सादर  अभिवादन 

स्नेह हेतु आभार 

Comment by shalini kaushik on April 14, 2013 at 8:56pm

.भावात्मक अभिव्यक्ति ह्रदय को छू  गयी  आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 14, 2013 at 7:37pm

अच्छी अभिव्यक्ति बधाई प्रदीप जी, नारी शक्ति का अहसास कराने, उनमे आत्म विश्वास जाग्रत करने की महती 

आवश्यकता है, ताकि नारी अपने को अबला नहीं सबला और समर्थ समझे | पुनः बधाई 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 14, 2013 at 4:50pm

आदरणीया प्राची जी 

सादर अभिवादन 

आपके समर्थन हेतु आभार. 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 14, 2013 at 4:49pm

आदरणीय अशोक जी 

सादर सस्नेह 

आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 14, 2013 at 4:48pm

आदरणीय पाठक जी 

सस्नेह 

आभार 

सादर 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 14, 2013 at 4:47pm

आदरणीया विजयश्री जी 

सादर अभिवादन 

स्नेह हेतु आभार 

सादर 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 14, 2013 at 4:46pm

आदरणीया कुंती जी 

सादर अभिवादन 

आपकी सहमति हेतु आभार 

सादर 

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