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 ‘‘गजल‘‘

एक प्रयास के फलस्वरूप प्रस्तुत है।

वज्न......1222 1222 1222 1222

हमारी जिन्दगी का जब सलीका सादगी नम है।

यहां बन्दे कयामत हैं तभी तो बन्दगी कम है।।1

सुना है शाम से पहले बनायें पाक दामन को।

अभी तो आपका *दम बस यहां शर्मिन्दगी गम है।।2......*अहंकार

कहो तो हम वजू करके नमाजी बन करें सजदा।

खुदा को गर गुनाही का बताओ गन्दगी *थम है।।3.....*रूकना

बने हम पन्च वक्ता पीर समझाए मुहम्मद को।

तभी तो दिल सुकूनों का बयां संजीदगी चम* है।।4........*उज्ज्वल/चमक

कहानी रोज कहती हैं लड़ाये कौम की बातें।

बड़े अक्सर कहा करते फकीरी जिन्दगी सम है।।5

के0पी0सत्यम/मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 26, 2013 at 6:24pm

आ0 सुरन्द्र वर्मा जी,   आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 23, 2013 at 8:40am

आदरणीय रक्ताले जी,  सादर प्रणाम!  सर जी,  उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत बहुत आभार।  सादर, 

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 22, 2013 at 10:53pm

वाह! आदरणीय केवल प्रसाद जी सादर, मुझे गजलों की बहुत अच्छी जानकारी तो नहीं है मगर मुझे आपकी गजल पढ़ने में बहुत अच्छी लगी. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 18, 2013 at 8:29pm

आ0 संदीप द्विवेदी जी,  आपने मेरे प्रयास को सराहा बहुत अच्छा लग रहा है।  आपने मेरा उत्साह बढ़ाया।  आपका हार्दिक आभार।  मित्र! मुझे गजल की ए0बी0सी0डी0 नहीं मालूम थी, बस इसी ओ0बी0ओ0 पर गजल की कक्षा से सीख रहा हूं।  कोशिश करूंगा कि आपके विश्वास पर खरा उतरूं। एक बार फिर आपका धन्यवाद।  सादर,

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 18, 2013 at 7:35pm

बहुत ही अच्छा प्रयास आदरणीय केवल जी! निरंतर अभ्यासरत रहें निखार सुनिश्चित है! बधाई..

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 18, 2013 at 8:50am

आदरणीया, कुन्ती मुखर्जी जी,  सुप्रभात व सादर प्रणाम!  जी मैम, बहुत ही नर्वस के बाद यह गजल बन पड़ी है।  आपको अच्छा लगा, प्रयास सफल हुआ।  आपका बहुत बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 18, 2013 at 8:43am

आदरणीय, राम शिरोमणि पाठक जी, प्रिय मित्र! सुप्रभात व नमस्कार!  मैं तो बहुत ही नर्वस  था। लेकिन अन्त में मार्ग खुला।  आपको अच्छा लगा, प्रयास सफल हुआ।  आपका बहुत बहुत आभार व धन्यवाद।  सादर,

Comment by coontee mukerji on April 18, 2013 at 2:37am

आदरणिय केवल जी , मैं इतना ही कह सकती हूँ .......आपकी गज़ल ...दूध में रूह आफ़जा.....सफल प्रयास के लिये बधाई . सादर

कुंती .

Comment by ram shiromani pathak on April 17, 2013 at 9:08pm

वाह क्या बात है आदरणीय भाई केवल जी //ग़ज़ल पे इतना अच्छा प्रयास  बहुत सुन्दर //हार्दिक बधाई  

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