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भारी भरकम काया,है बड़ी विचित्र माया ,
खुद खाती ठूसकर ,मुझपे चिल्लाती है !
हुआ वजन सौ किलो ,फिर भी दम ना लेती ,
गुंडई तो देखो इसे ,डाइटिंग बताती है !!
खर्राटे जब लेती है,मानो भूकंप आ गया ,
पड़ोसियों की भी तब ,नींद टूट जाती है !
अपने को अल्पहारी ,मुझे कहती है पेटू ,
रसोई का आधा खाना,खुद चाट जाती है !!

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 798

Comment

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Comment by ram shiromani pathak on May 17, 2013 at 8:38pm

hardik aabhar priyankaa ji///apko sahane me safal to likhana bhi safal

Comment by Priyanka singh on May 17, 2013 at 8:27pm

ha ha ha khuub Ram ji 

Comment by ram shiromani pathak on May 17, 2013 at 8:23pm

hardik aabhar adarneeyaa sarita ji 

Comment by ram shiromani pathak on May 17, 2013 at 8:22pm

hardik aabhar adarneey ashok sir

Comment by ram shiromani pathak on May 17, 2013 at 8:22pm

hardik aabhar bhai manoj shukla ji

Comment by Sarita Bhatia on May 17, 2013 at 7:25pm

वाह राम जी राम राम 

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 23, 2013 at 8:46am

भाई राम शिरोमणि जी सादर, सुन्दर प्रयास हुआ है हास्य भी है मगर कार्य शेष है.सतत प्रयास करें. इस सुन्दर प्रयास के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by manoj shukla on April 21, 2013 at 6:11am
हा...हा....हा....सुन्दर हास्य...बधाई स्वीकार करें आदर्णीय
Comment by ram shiromani pathak on April 19, 2013 at 8:08pm

आदरणीय भाई केवल प्रसाद जी हार्दिक आभार उत्साह बढ़ाने के लिए .सादर ///////

Comment by ram shiromani pathak on April 19, 2013 at 8:07pm

आदरणीया प्राची मैम आप का आशीर्वाद मिला अपार प्रसन्नता हुई !
प्रणाम सहित हार्दिक आभार

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