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कुछ खरी खोटी....कुण्डलिया

कुणडलिया
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लाख दवायें कर रहे, कम ना होता रोग
लिखा शास्त्र मे है यही, सबसे उत्तम योग
सबसे उत्तम योग, रोग यह दूर भगाता
ह्रदयों मे उत्साह , बदन मे फुर्ती लाता
स्वस्थ वही हैं आज, योग जो करते जायें
काम करे जो योग, करे नहि लाख दवायें
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बात बनाना है कला, बात सही यह जान
भागदौड की जिंदगी, आता हरदम काम
आता हरदम काम, मुसीबत दूर भगाता
मुश्किल जो हैं काम, उसे यह सहज बनाता
कहते हैं कविराय, पडा उसको पछताना
सीख सका नहि आज, अभी तक बात बनाना
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मौलिक व अप्रकाशित

Views: 717

Comment

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Comment by manoj shukla on May 11, 2013 at 5:58pm
आदर्णीय बृजेश जी सादर आभार
Comment by manoj shukla on May 11, 2013 at 5:57pm
आदर्णीय प्रदीप जी आपका सादर आभार
Comment by बृजेश नीरज on May 11, 2013 at 1:16pm

सुन्दर कुण्डलिया! सादर बधाई स्वीकारें

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 10, 2013 at 6:17pm

कहते हैं कविराय, पडा उसको पछताना
सीख सका नहि आज, अभी तक बात बनाना
-योग जरूरी पर बात बनाना बहुत जरूरी 

सादर बधाई 

Comment by manoj shukla on May 10, 2013 at 5:10am
आदर्णीया कुन्ती जी...आपका हार्दक आभार... आपका सुझाव ठीक लगा...प्रयास करेंगे...सादर आभार
Comment by coontee mukerji on May 9, 2013 at 11:41pm

मनोज जी , आपने बहुत अच्छा लिखा है लेकिन विषय को अगर और विस्तार देते तो एक पूर्ण रचना बन जाती . सादर / कुंती

Comment by manoj shukla on May 9, 2013 at 9:14pm
आदर्णीया... सीमा जी , आपसे प्रशंशा पाकर मै धन्य हुआ...सादर आभार
Comment by seema agrawal on May 9, 2013 at 7:47pm

बढ़िया कुण्डलिया छंद मनोज जी ....हार्दिक बधाई 

Comment by manoj shukla on May 9, 2013 at 6:16pm
आदर्णीय...... अरुन जी...आपका सादर आभार....स्नेह बनाये रखें आदर्णीय
Comment by अरुन 'अनन्त' on May 9, 2013 at 5:10pm

भाई मनोज शुक्ला जी जैसा विषय चुना है ठीक वैसी ही कुण्डलिया भी प्रस्तुत की हैं आपने, इस शानदार रचना हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

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