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दिल से सुन ओ भाई .... ---------------------------

दिल से सुन ओ भाई ....
---------------------------
किसी की किस्मत पर जलने वालों के
दिलों को ठंडक कहाँ मिलती है,
किस्मत के धनी को इनकी परवाह भी कहाँ होती है.
देख उस खुदा की तरफ जिसने जहाँ बनाया...
तुझे और मुझे खाली हाथ यहाँ भिजवाया.
सद-कर्म से तू मर्म और धर्म का ईमान रख
अपने पे भरोसा कर, नेकी की राह चल.
बुलंदी के रास्ते तो खुद-ब खुद खुल जायेंगे
जलता रहा गर यूँ ही अगर
मातम के दरवाज़े पीढ़ी दर पीढ़ी खुल जायेंगे.
- दिनेश
शुभ प्रभात

अप्रकाशित और स्वरचित
दिनेश सोलंकी

Views: 576

Comment

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 14, 2013 at 9:18pm

आ0 दिनेश भाई जी,  वाह!  बहुत ही सुन्दर रचना।  बधाई स्वीकारें।   सादर,

Comment by Sumit Naithani on June 14, 2013 at 1:08pm

किसी की किस्मत पर जलने वालों के 
दिलों को ठंडक कहाँ मिलती है,
किस्मत के धनी को इनकी परवाह भी कहाँ होती है............सुंदर रचना.

Comment by coontee mukerji on June 14, 2013 at 12:41am

दिनेश भाई बहुत अछा लिखा है .

Comment by Pragya Srivastava on June 13, 2013 at 4:48pm

सुंदर रचना................

Comment by aman kumar on June 13, 2013 at 4:34pm

 सुंदर प्रस्तुतिकरण....शुभकामनाऐं

Comment by Shyam Narain Verma on June 13, 2013 at 12:47pm

 अतिसुन्दर...............

Comment by विजय मिश्र on June 13, 2013 at 11:51am
शुभ प्रभात एवं सांत्वना के लिए साधुवाद
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 13, 2013 at 10:26am
आदरणीय...दिनेश जी, सुंदर प्रस्तुतिकरण....शुभकामनाऐं

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