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यूँ तो तू चला गया,
किंतु, जाकर भी है यहाँ !
ख्वाबों में,
फर्श पर पड़े कदमों के निशानों में,
है तेरी पायल की छमछम अब भी I
तेरी कोयल सी आवाज़,
आरती के स्वरों में गूँजती है अब भी I
तू नहीं है अब,
किंतु,
तेरी परछाई
चादर की सलवटों में है वहीं I
तू चला गया,
क्यूँ ?
ये राज़ बस तुझे ही पता I
फिर भी तेरे प्यार की कुछ यादें हैं,
जो छूट गईं
यहीं घर पर I

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Comment by Veerendra Jain on December 13, 2010 at 12:03pm

Anita ji... bahut bahut aabhar..rachna padhne aur sarahana karne ke liye aabhar..

Comment by Anita Maurya on December 11, 2010 at 4:34pm

फिर भी तेरे प्यार की कुछ यादें हैं,
जो छूट गईं
यहीं घर पर I वाह .. आँखें नम हो गयी ... भावनापूर्ण कविता ...

Comment by Veerendra Jain on December 9, 2010 at 12:11pm
dhanyawd Asha ji..
Comment by Veerendra Jain on December 9, 2010 at 11:55am
Bhaskar ji...dhanyawad..
Comment by Veerendra Jain on December 9, 2010 at 11:55am
Neelam ji...bahut bahut aabhar..
Comment by Veerendra Jain on December 9, 2010 at 11:51am
Lata ji...hardik aabhar..
Comment by Veerendra Jain on December 9, 2010 at 11:50am
Tiwari Sir..utsahvardhan ke liye dhanyawad...
Comment by Veerendra Jain on December 9, 2010 at 11:49am
Yograj ji..aap logon ko rachna achi lagi...to likhna sarthak...bahut bahut dhanyawad
Comment by Veerendra Jain on December 9, 2010 at 11:45am
bahut bahut aabhar...Arun ji..
Comment by Bhasker Agrawal on December 8, 2010 at 3:12pm
सुन्दर भाव

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