For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एकाकी, एकाकी
जीवन है एकाकी...
मैं भी हूँ एकाकी,
तू भी है एकाकी,
जीवन पथ पर चलना है
हम सबको एकाकी I
 

ना कोई तेरा है,
ना है किसी का तू,
मोह-माया के फेरे में
जीवत्व है एकाकी I

 

आया तू अकेला था,
जाएगा भी अकेला ही,
आने-जाने के इस क्रम में
होना है एकाकी I
 

संसार के मेले में,
भ्रमों का रेला है,
बहने की है नियती
जड़ को तो बहना है,
स्मरण मगर रख ले
चेतन ये एकाकी I

 

ये तन है क्षण भन्गुर,
पल में मिट जाएगा,
माटी का है ढेला ये,
माटी में ही मिल जाएगा,
तन के इस सुख-दुख में
खुद को रख एकाकी I

 

लाया ना संग कुछ भी,
जाना भी है खाली हाथ,
कर्मों का इक लेखा
होगा बस तेरे साथ,
द्वार पर परमात्मा के
हर आत्मा है एकाकी I

 

एकाकी, एकाकी
जीवन है एकाकी...

Views: 791

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Veerendra Jain on January 20, 2011 at 3:35pm
Ashish ji...aapne mera hausla badhaya..iske liye bahut dhanyawad...
Comment by आशीष यादव on January 20, 2011 at 11:04am
जीवन के अंतिम सत्य से अवगत कराती है यह रचना| बहुत सुन्दर, खुद आचार्य जी ने भी कहा है|
Comment by Veerendra Jain on December 30, 2010 at 4:48pm
Yograj ji....bahut bahut shukriya hausla afzai ke liye...

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 30, 2010 at 2:59pm
इस कविता का सूफियाना अंदाज़ दिल को छू लेने वाला है वीरेन्द्र भाई - साधुवाद !
Comment by Veerendra Jain on December 27, 2010 at 12:19pm
बिल्कुल सही कहा आपने नवीन भैया, आचार्य जी ने रचना पढ़ ली एवम् मार्गदर्शन भी कर दिया , यही बहुत है मेरे लिए... और उनके समझाने का ढंग अदभुत है...नमन है उनको...
नवीन भैया... आपने रचना सराही...इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद...आप लोगों का प्रोत्साहन आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है..
Comment by Veerendra Jain on December 27, 2010 at 12:07pm

आचार्य जी... आपने मेरी रचना पढ़ी एवम् मार्गदर्शन किया इसके लिए हार्दिक आभारी हूँ आपका...
आप जैसा कह रहे हैं कि चोला के स्थान पर "लेखा" हो, यही उचित है...चोला शब्द अनुचित ही प्रतीत हो रहा है...मुझे सुधारने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद..
सलिल जी....सामाजिक जीवन को लेकर मेरा सोचना ये था कि सामाजिक दायित्वों का वहन तो हमें करना ही है किंतु, इन सबमे  आत्मा को एकाकी रखा जाए, इसलिए मैने ये पंक्तियाँ लिखने की कोशिश की..

बहने की है नियती
जड़ को तो बहना है,
स्मरण मगर रख ले
चेतन ये एकाकी I
कृपया मेरी ये शंका दूर करें एवम् कोई त्रुटि हो तो मुझे अवश्य अवगत कराएँ जिससे मैं स्वयं को सुधार सकूँ...
धन्यवाद...

Comment by Veerendra Jain on December 27, 2010 at 11:54am
Neelam ji...hardik aabhar...
Comment by Veerendra Jain on December 27, 2010 at 11:53am
Zirvi sahab.. bahut bahut shukriya..
Comment by Veerendra Jain on December 27, 2010 at 11:52am
Ganesh ji... rachna pasand karne aur hausla badhane ke liye bahut bahut aabhar..
Comment by Neelam Upadhyaya on December 27, 2010 at 10:41am

लाया ना संग कुछ भी,
जाना भी है खाली हाथ,
कर्मों का इक चोला
होगा बस तेरे साथ,
द्वार पर परमात्मा के
हर आत्मा है एकाकी I

 

जी,  यही जीवन का सत्य है । बहुत सुन्दर । यथार्थ को प्रदर्शित करती अइस कविता के लिए बहुत बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
19 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
19 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
20 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
20 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
21 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
22 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service