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दीप जली ज्योति होई , सब कोई हसी केहू ना रोई ,

दीप जली ज्योति होई ,
सब कोई हसी केहू ना रोई ,
इ कब होई .
जब हिंदुस्तान में ,
हिंदुस्तान के ,
सोचे वाला नेता पैदा होई ,
त दीप जली ज्योति होई ,
सब कोई हसी केहू ना रोई ,
अइसन तबो हो सके ला ,
राज अइसन नेता ,
मुह्कर्खी लगा जास ,
नेता जी अइसन बेटा ,
फिर से आ जास ,
कौनो आजाद ,
भगत अइसन रंगदार ,
हिंदुस्तान में होई ,
त दीप जली ज्योति होई ,
सब कोई हसी केहू ना रोई ,
देश के बाटे वाला ,
छोट छोट राजनीती पार्टी ,
अपन छेत्रिये राजनीत के भुला के ,
हिंदुस्तान के इज्जत आपन समझ के ,
हिंद के बिचार अपना ली ,
त दीप जली ज्योति होई ,
सब कोई हसी केहू ना रोई ,

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on September 6, 2010 at 6:09pm
आमीन| गुरु जी बहुत सुन्दर विचार..सुन्दर कविता|
Comment by Babita Gupta on March 22, 2010 at 3:35pm
Ravi bhaiya, rauwa ta bahut nik likhaley hai, jyoti jali ta parakash ta jaroor hoi, jaroorat jyoti jalawey wala logan k hai, bahut niman kriti.
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on March 20, 2010 at 5:44pm
bahut badhiay guru jee........kaash guru jee aisan hoit ki sudhar jait neta log aur desh bach jait.....

bahut shaandar hamesha ke tarah ek aur jaandaar aur sundar rachna,,,.............
Comment by Admin on March 20, 2010 at 2:43pm
बहुत ही खुबसुरत कविता आपने पोस्ट किया है, अगर नेता लोग सुधर जाये तो देश कि ९०% समस्या ऐसेही खत्म हो जयेगी ।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 20, 2010 at 2:37pm
Bhut badhiya Guru jee, kash Raur sapna satya ho jaait, bahut niman kavita ba, bahut bahut dhanyabad ba .

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