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न जीने की खवाहिश ज़हर चाहता हू
तुमाहरे ही हातों मगर चाहता हू

वो मिल जाए मुझको है जिसकी तमन्ना
मै अपनी दुआ में असर चाहता हू

कही मर न जाऊ यह लेकर तमन्ना
तुम्हरी झलक एक नज़र चाहता हू

है मुद्दत से कतए ताल्लुक हमारा
तुझे आज भी मै मगर चाहता हू

तेरा साथ काफी ए मेरे अलीम
न माल और दौलत न घर चाहता हू

katye means ------chod dena

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 19, 2010 at 8:34pm
बहुत बढ़िया अलीम भाई, फिर आपने गर्दा उड़ाया है, जबरदस्त,
Comment by Babita Gupta on May 19, 2010 at 12:15pm
Behtari aur sanjida ghazal likha hai Aleem jee ney , badhiya laga,thanks,
Comment by Admin on May 18, 2010 at 12:35pm
कही मर न जाऊ यह लेकर तमन्ना
तुम्हरी झलक एक नज़र चाहता हू,

अलीम जी, अच्छी ग़ज़ल कहा है आपने, एक बार फिर आपने अच्छी प्रस्तुति दी है, सादर धन्यवाद,
Comment by satish mapatpuri on May 17, 2010 at 11:36am
वो मिल जाए मुझको है जिसकी तमन्ना
मै अपनी दुआ में असर चाहता हू
अलीम साहेब, आदाब , आपका अंदाजे बयां काबिले तारीफ है . शुक्रिया .
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 16, 2010 at 4:54pm
वो मिल जाए मुझको है जिसकी तमन्ना
मै अपनी दुआ में असर चाहता हू
bahut hi badhiya aleem bhai....aisehi likhte rahe...

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