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सितारों जड़ी चुनरी नित-निश
लहर दिशा महके री।

झांक रही केसर
मुख नारी,
पर्वत ओट लिए
दृग कारी।
काजल रेख दूर
तक पारी,
गाल गुलाल
मुस्कान प्यारी।
अधर बीच बिजली री !

स्वर्ण किरन ने
ली अंगड़ाई,
शबनम करती
चली रूषाई।
कल कल धुन सुन
सरिता मचले,
गिरि से गिर कर
झरना उछले।
बांह बॅधें नहि मछरी !

पानी में केसर
मुख धोए,
हर हर गंगे
बोल सुहाए।
निखरा रूप
सलोना सुन्दर,
जल रक्त वर्ण
आग लगाए।
चिडि़यां चहकी वन री!।

कमल-सरोवर
जन मन भाए,
जल पर पत्ते
धानी छाए।
भ्रमर प्रेम का
राग सुनाए,
मोर मचल कर
नाच दिखाए।
भोर बड़ी चंचल री!।

के0पी0सत्यम/ मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 19, 2013 at 10:03am

आ0 लड़ीवाला सर जी,  आपका स्नेह व आशीष पाकर मन प्रफुल्लित हो गया।  उत्साहवर्धन करने हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 19, 2013 at 10:02am

आ0 जितेन्द्र भाई जी,  आपका स्नेह व सराहना पाकर मन प्रफुल्लित हो गया।  उत्साहवर्धन करने हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 19, 2013 at 10:01am

आ0 आशीष सर जी, आपको मंच पर पुनः पाकर हृदय आल्हादित है। आपका स्नेह व सराहना पाकर मन प्रफुल्लित हो गया।  उत्साहवर्धन करने हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 19, 2013 at 9:57am

आ0 महिमा जी, आपका स्नेह व सराहना पा कर मन प्रफुल्लित हो गया।  उत्साहवर्धन करने हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 19, 2013 at 9:56am

आ0 राजेश कुमारी जी, आपका स्नेह व सराहना पा कर मन प्रफुल्लित हो गया।  उत्साहवर्धन करने हेतु आपका तहेदिल से बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 18, 2013 at 7:36pm

भोर को नारी रूप के सुन्दर बिम्बों से अलंकृत करते हुए पगी सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई श्री केवल प्रसाद जी | वाह 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 18, 2013 at 7:20pm

आदरणीय..केवल जी, सुंदर व् भावनाओ से ओत प्रोत रचना पर हार्दिक बधाई

Comment by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on July 18, 2013 at 10:17am

भोर को सुंदर स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया। बहुत सुंदर।

Comment by MAHIMA SHREE on July 17, 2013 at 8:54pm

झांक रही केसर
मुख नारी,
पर्वत ओट लिए
दृग कारी।
काजल रेख दूर
तक पारी,
गाल गुलाल
मुस्कान प्यारी।
अधर बीच बिजली री

बहुत ही सुंदर भोर ... बहुत -२ बधाई आपको आदरणीय केवल जी ..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 17, 2013 at 8:34pm

वाह भोर का कितना सुन्दर द्रश्य शब्दों में बाँधा है बहुत अच्छा लगा पढ़ के इस प्यारी रचना हेतु बधाई आपको 

कृपया ध्यान दे...

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