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अधरों का कम्पन
पुष्प से कोमल कपोल
मनमोहक मादक अदा
मद मस्त अगड़ाई
गीले बालों का झरना
तिरछी मदभरी पलके
केश रूपी लतिका की
ओट से निहारना
हाय !उनका अनछुआ स्पर्श

अंग अंग से टपकती कामुकता
प्रेम की बहती शीतल बयार
नसों का रुधिर वेग बेकाबू
आलिंगन को मै बेकल 
वातावरण जैसे 
अदभुत जादुई ग्रह हो
पुर्णतः पाषाण शिला सा मैंने
निःशब्द  प्रेम का आह्वान किया

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक /अप्रकाशित

Views: 525

Comment

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Comment by ram shiromani pathak on August 20, 2013 at 4:51pm

हार्दिक आभार आदरणीया गीतिका जी//सादर 

Comment by वेदिका on August 20, 2013 at 4:43pm

सुंदर और सुकोमल शब्दों का समावेश किया कविता में| प्रथम दृष्टया तो प्रतीत हुआ की कोई पुरानी हिंदी फिल्म देख रही हूँ!!

बधाई !!

Comment by ram shiromani pathak on August 20, 2013 at 4:20pm

हार्दिक आभार आदरणीय विजय मिश्र जी/सादर 

Comment by ram shiromani pathak on August 20, 2013 at 4:19pm

हार्दिक आभार भाई जीतेन्द्र जी/सादर 

Comment by ram shiromani pathak on August 20, 2013 at 4:19pm

हार्दिक आभार भाई अमन कुमार जी/सादर 

Comment by ram shiromani pathak on August 20, 2013 at 4:18pm

हार्दिक आभार आदरणीया वसुंधरा जी/सादर 

Comment by विजय मिश्र on August 8, 2013 at 11:33am
रामशिरोमणीजी , रसों में पगी जीलेबी से कम रसदार नहीं है आपकी कविता एकदम कुरमुरी और अंत की दो पंक्तियाँ अचानक मन को शांत कर देतीं हैं .बहुत सुंदर सृजन , बधाई आपको .
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 8, 2013 at 9:16am

अधरों का कम्पन
पुष्प से कोमल कपोल
मनमोहक मादक अदा
मद मस्त अगड़ाई .............बहुत ही सुंदर पंक्ति

मनमोहने वाली रचना पर,हार्दिक बधाई आदरणीय राम भाई

Comment by aman kumar on August 7, 2013 at 3:32pm

सच मे आपने एक आकर्षण बना दिया अपने प्रितम को 

आभार 

Comment by Vasundhara pandey on August 7, 2013 at 11:36am

बहुत ही सुन्दर प्रेम का आह्वान...प्रेम से ओत प्रोत रचना के लिए बधाई आपको...!!

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