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!!! गीत !!!


तुम राष्ट् के कर्णधार देवदूत हो,
यदि शांति का, मार्ग दर्शन कर सकोगे?

नित नये नूतन किसलय अरूणिमा में,
या सांझ की श्याम धुन बांसुरिया हो।
धूप भी चन्दन लगेगा दोपहरिया में,
राष्ट् को यदि कीर्ति गौरव दे सकोगे? 1

तुम मनुष्य हो कर्म का फल भूल जाओ,
देश-धर्म हित लड़ो स्व भूल जाओ।
प्यार की पवि़त्र गंगा हर कहीं हो,
राष्ट् को यदि एक भगीरथ दे सकोगे? 2

सत्यम आहिंसा प्रेमु धन खूब लुटाओ,
राजपथ का मार्ग भी अवरूध्द हो जाये।
ज्ञान की वर्षा से जन शिक्षित हो जाये,
राष्ट् को यदि एक गांधी दे सकोगे? 3

देश हो गुलशन बहारें महका देंगी,
देश के कृषक और जवान झूम उठेंगे।
अन्न का अम्बार-त्यौहार जगमगाये,
राष्ट् को यदि लाल-जवाहर दे सकोगे? 4

के0पी0सत्यम/मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 16, 2013 at 6:26pm

आ0 प्राची मैम जी,  आपके स्नेह और सुविचारों से लेखनी को बल मिला है।  आपका हृदयतल से आभार।   सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 14, 2013 at 10:20pm

बहुत सुन्दर स्पष्ट विचारों को शब्द दिए हैं आपने इस गीत में आ० केवल प्रसाद जी 

बस शिल्प निर्वहन में कुछ कमी रह गयी जो सतत प्रयास से ही सधती जायेगी 

बहुत बहुत शुभकामनाएँ 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 14, 2013 at 9:31pm

आ0 सौरभ सर जी, सादर प्रणाम! आपका आशीष पाकर मैं धन्य हो गया। आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदयतल आभारी हूं। सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 14, 2013 at 4:02pm

एक अरसे बाद आपसे कोई गीत सुन रहा हूँ,  भाई केवल प्रसाद जी.  बधाई स्वीकारिये.

रचना का विधान अपनी जगह.. उसका निर्वहन तो होता रहेगा. 

गीत अपने उद्येश्य में सफल है. 

बार बार बधाई.. . 

शुभेच्छाएँ

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 13, 2013 at 9:28pm

आ0 विजय सर जी,  सादर प्रणाम!   आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदय तल से आभारी हूं।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 13, 2013 at 9:27pm

आ0 बसंत भाई जी,  सादर प्रणाम!   आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदय तल से आभारी हूं।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 13, 2013 at 9:26pm

आ0 कल्पना रामानी दी जी,  सादर प्रणाम! आपकी टिप्पणी मेरे लिए बेशकीमती है।  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदय तल से आभारी हूं।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 13, 2013 at 9:22pm

आ0 भण्डारी भाई जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदय तल से आभारी हूं।  सादर

Comment by विजय मिश्र on August 13, 2013 at 1:42pm
सुंदर ,बहुत सुंदर गीत और प्रेरक आह्वान भी . बधाई केवलजी
Comment by बसंत नेमा on August 13, 2013 at 11:20am

बहुत सुन्दर  देश प्रेम से ओतप्रोत रचना बधाई आ0 सत्यम जी 

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