For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गुमशुदा खुशियां कहां रहने लगी है आज छुप कर

गुमशुदा खुशियाँ कहाँ रहने लगी है आज छुप कर

***************************************

दर्द कैसे कम हुआ ये आंसुओं पूछ लेना

क्या अन्धेरों से डरे थे, तुम दियों से पूछ लेना

खुद जले थे,और कैसे, वो अन्धेरों से लडे थे

जानना चाहो अगर तो,जुगनुओं से पूछ लेना

आपकी प्रतिक्रिया कितनी सही कितनी ग़लत है

फैसला करने से पहले दोस्तों से पूछ लेना

रहबरी के नाम पे तो लूट जारी है यहां पर

रास्ता भूलो अगर तो रहजनों से पूछ लेना

गुमशुदा खुशियाँ कहाँ रहने लगी है आज छुप कर  

जो भी ग़म घेरे हुये हैं, उन ग़मों से पूछ लेना

किस तरह मैने गुज़ारा वक़्त अपना उन दिनों में

तुम घिरोगे जब कभी तो उलझनों से पूछ लेना

.

गिरिराज भंडारी

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

Views: 1041

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Neeraj Nishchal on August 16, 2013 at 10:17pm

- रहबरी ---(-एक व्यंग है ) हमारे पथ प्रदर्शक जिस तरीक़े , निर्दयता से हमे लूट है , सच के लुटेरे होते तो इतनी बेरहमी से नही लूट्ते , इस लिये अब भरोसा रहजन पे जादा हो गया है या करना चाहिये !

कमाल कर दिया ,मालिक इतना गहरा अर्थ
जहाँ ना पहुंचे रवि ।
वहां पहुंचे रवि ।
इस बात को आपने आज सार्थक कर दिया ,
बहुत बहुत आभार
बहुत ज्यादा ख़ुशी हो गयी मिलकर आपसे ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 16, 2013 at 7:14pm

गुमशुदा खुशियाँ कहाँ रहने लगी है आज छुप कर  

जो भी ग़म घेरे हुये हैं, उन ग़मों से पूछ लेना

                                                         नीरज भाई , इस शे र मे मैने ये कहने की कोशिश की है , इंसान अपने दुखों का कारण स्वयँ को घेरे हुये दुखों के कारणो( से पूछ कर )का विश्लेशण कर के जान सकता है , और उन कारणो को हटा देने से ही गुमी हुई खुशियों का प्राप्त कर सकता है !( इंसान स्वभावतह अपने दुखों का कारण हमेशा दूसरो मे खोजता है , खुद की गलतियो मे कभी नही खोजता )

2- किस तरह --- इसमे बड़ी बात नही है , जिस प्रकार आंतरिक खुशी को शब्दो मे बयान करना मुश्किल होता है वैसे ही सहन किये तक़लीफो को भी बताना मुश्किल है , जब आप उलझन मे घिरोगे तभी समझ सकोगे !

3 - रहबरी ---(-एक व्यंग है ) हमारे पथ प्रदर्शक जिस तरीक़े , निर्दयता  से हमे लूट है , सच के लुटेरे होते तो इतनी बेरहमी से नही लूट्ते , इस लिये अब भरोसा रहजन पे जादा हो गया है या करना चाहिये !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 16, 2013 at 6:39pm

हौसला अफज़ाई के लिये शुक्रिया नीरज भाई !!

Comment by Neeraj Nishchal on August 16, 2013 at 5:14pm
गुमशुदा खुशियाँ कहाँ रहने लगी है आज छुप कर
जो भी ग़म घेरे हुये हैं, उन ग़मों से पूछ लेना

किस तरह मैने गुज़ारा वक़्त अपना उन दिनों में
तुम घिरोगे जब कभी तो उलझनों से पूछ लेना
.
भंडारी जी बेशक ये पंक्तियाँ बहुत खूबसूरत हैं ,
पर इस पंक्ति का अर्थ स्पष्ट करने की कृपा करें ,
इतनी सुन्दर ग़ज़ल के लिए आभार ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 16, 2013 at 9:54am

आदरणीय माथुर जी , हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 16, 2013 at 9:53am

बहुत बहुत धन्यवाद , महिमा जी !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 16, 2013 at 9:50am

बहुत 2 शुक्रिया , आन्नपुरणा जी हौसला अफज़ाई के लिये !

Comment by annapurna bajpai on August 15, 2013 at 10:22pm

आदरणीय गिरि राज जी बहुत उम्दा प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by MAHIMA SHREE on August 15, 2013 at 10:03pm

गुमशुदा खुशियाँ कहाँ रहने लगी है आज छुप कर  

जो भी ग़म घेरे हुये हैं, उन ग़मों से पूछ लेना

वाह बहुत खूब !! बधाई आपको

Comment by D P Mathur on August 15, 2013 at 9:54pm

अच्छी गजल की बधाई स्वीकार करें !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service