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तोमर छंद, प्रत्येक चरण में १२ मात्राएँ तुकान्त चरणान्त गुरु लघु से अंत )

.

चोरी का बुना  जाल  ,फंस गए नन्द लाल

देख दधि मटकी  हाल , हुई मैया  बेहाल

पड़  गया उल्टा दांव,  जब पकड़ा दबे पाँव,

ढूंढें नहि मिली ठांव, जा छुपा तरु की छाँव  

 

कर से पकड़ के कान ,मांगे क्षमा का दान

 बनकर कहे अनजान,रखा  मित्रता का  मान

देखे दृग लाल लाल,क्रोध का थमा उबाल

उर से लगाया लाल,हुई यशोदा निहाल

 

शांत हुआ जब धमाल,बहि निकले ग्वाल बाल

हँस कर  कहे गोपाल ,जान बची बाल बाल 

 

*********************************** 

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

सब को श्रीकष्ण जन्माष्टमी की बधाइयां   

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Comment by बृजेश नीरज on August 29, 2013 at 7:53pm

बहुत ही सुंदर दृश्य उकेरा है आपने! वाह! आपको बहुत बहुत बधाई!

Comment by विजय मिश्र on August 29, 2013 at 5:33pm
जय हो यशुमति के लाल की ,बाल गोपाल और नान्हेजी के कमाल की . मनोहारी रचना . साधुवाद राजेशजी
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 28, 2013 at 9:38pm

आदरणीया राजेश जी, अति सुंदर छंद , हार्दिक बधाई व् जन्माष्टमी की शुभकामनायें आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 28, 2013 at 8:38pm

आदरणीय जवाहर लाल सिंह जी आपको भी  श्री कृष्ण  जन्माष्टमी की बधाई |

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 28, 2013 at 7:33pm

जय श्री कृष्ण ! जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 28, 2013 at 6:20pm

 आदरणीय गिरिराज भंडारी जी हार्दिक आभार के साथ आपको भी बधाई  |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 28, 2013 at 5:37pm

आदरणीया , अति सुन्दर छन्द ! बधाई !! आपको भी श्री क़ृष्ण जन्माष्टमी की शुभ कामनायें !!

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