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आज इस खामोश रात में,तुम को याद में करता हूँ

आज इस खामोश रात में,तुम को याद में करता हूँ
अतीत के बीते पन्नों को,उलट उलट के पढता हूँ

आज इस खामोश रात में,तुम को याद में करता हूँ

जब सर पे तेरा साया था
तब ये ख्याल न आया था
अब ओढ़ के काले अम्बर को
आँचल तेरा समझता हूँ

आज इस खामोश रात में,तुम को याद में करता हूँ

कहता था याद करूंगा नहीं
कभी भी बात करूंगा नहीं
पर आज तुम्हारी यादों को
आँखों में सजा के रखता हूँ

आज इस खामोश रात में, तुम को याद में करता हूँ

तब सपने अपने बुनता था
तुम्हारी एक न सुनता था
अब ज़िक्र तुम्हारी बातों का
में हर महफ़िल में करता हूँ

आज इस खामोश रात में, तुम को याद में करता हूँ

जिन चरणों की सेवा को में
मुसीबत एक समझता था
अब उन्हीं तुम्हारे चरणों के
अहसास को में तरसता हूँ

आज इस खामोश रात में, तुम को याद में करता हूँ

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Comment

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Comment by Bhasker Agrawal on December 25, 2010 at 11:55am
धन्यवाद वीरेन्द्र जी
Comment by Veerendra Jain on December 25, 2010 at 11:52am
bahut hi badiya abhivyakti.. bhaskar ji.. bahut bahut badhai...
Comment by Bhasker Agrawal on December 25, 2010 at 10:15am
धन्यवाद गणेश जी

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 25, 2010 at 9:55am

जब सर पे तेरा साया था
तब ये ख्याल न आया था
अब ओढ़ के काले अम्बर को
आँचल तेरा समझता हूँ ....

भाष्कर जी , यह बेहतरीन रहा, काले अम्बर को आँचल समझना, उम्द्दा ख्यालात है भाई , शायद इंसान की नियति यही है जो मिलता है उसका मोल खोने के बाद समझ मे आता है |

बधाई स्वीकार कीजिये इस बेहतरीन अभिव्यक्ति पर ...

Comment by Bhasker Agrawal on December 25, 2010 at 2:28am
धन्यवाद लता जी
Comment by Lata R.Ojha on December 24, 2010 at 11:27pm
अपनों की कमी उनके ना रहने पर ही सालती है तब हम उन तक ना पहुच पाने की असमर्थता में बस बीते पलों को याद करके रह जाते हैं..अति भावपूर्ण .. 
Comment by Bhasker Agrawal on December 24, 2010 at 10:19pm
आभार अनीता जी
Comment by Anita Maurya on December 24, 2010 at 4:53pm
सच कहा आपने .. जब तक हमारे अपने हमारे पास रहते हैं हम उनकी क़द्र नहीं जान पाते ..लेकिन जब वो हमारी जिंदगी से चले जाते हैं तो उनकी कमी का एहसास होता है ....

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