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है हंसी रात बस चले आओ 

बहके जज़्बात बस चले आओ !

        

उसने वादा किया वफ़ा देंगे

दे रहा घात बस चले आओ !

ज़िन्दगी हो गई है आवारा

क्या सवालात बस चले आओ !

ठन्डे पानी मे भी बदन जलता

क्या ये बरसात बस चले आओ !

"म“ञ्जरी" अब सहा नही जाता 

अरज़े हालात बस चले आओ !

अप्रकाशित एवम मौलिक रचना  !

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Comment

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 8, 2013 at 12:00am

उसने वादा किया वफ़ा देंगे

दे रहा घात बस चले आओ !

ज़िन्दगी हो गई है आवारा

क्या सवालात बस चले आओ !

आदरणीया मंजरी जी ...आज के समय के दर्द को समेटे ...और प्रेम को प्रधानता देते आह्वान करते ...बस चले आओ ...अच्छी गजल

आभार

भ्रमर ५
प्रतापगढ़

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 5, 2013 at 3:13am

ज़िन्दगी हो गई है आवारा

क्या सवालात बस चले आओ !........वाह! बहुत खूब, यह शेर पसंद आया

बेहद शानदार गजल, बधाई स्वीकारें आदरणीया मंजरी जी

Comment by मोहन बेगोवाल on September 4, 2013 at 10:56pm

 आदरनीया मंजरी जी,

गजल बहुत शानदार हे  ,मुझे ये शेर बहुत अच्छा लगा -बधाई हो 

Comment by बृजेश नीरज on September 4, 2013 at 7:13pm

अच्छी रचना हुई है। आपको हार्दिक बधाई!

Comment by राजेश 'मृदु' on September 4, 2013 at 5:49pm

सुंदर, सरल एवं मधुर प्रस्‍तुति के लिए हार्दिक बधाई । बहके जज्‍बात से चले आओ - इस तरह से कोई गजल लिखी जा सकती है क्‍या, जानना चाहता हूं, सादर

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 4, 2013 at 4:41pm

आदेर्नीया मंजरी जी ..सरल शब्दों में भावभरी ग़ज़ल ..एक बिरहनी के बिरह का सजीव चित्रण करती ग़ज़ल /....आपको हार्दिक बधाई 

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on September 4, 2013 at 3:44pm

वाह्ह्ह्ह्ह वाह्ह्ह वाह्ह्ह मंजरी दीदी ,,,शानदार गज़ल ,,,क्या बात है,,,आपको अनेकानेक बधाइयाँ

Comment by vijay nikore on September 4, 2013 at 1:06pm

सरलता इस गज़ल की खूबी है। बहुत अच्छी लगी। शत-शत बधाई।

सादर,

विजय निकोर

Comment by Shyam Narain Verma on September 4, 2013 at 10:17am
बहुत ही सुन्दर! हार्दिक बधाई आपको!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 4, 2013 at 8:59am

मंजरी जी ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी दाद कबूलें |

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