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तुझको देखूं, तुझे चाहूँ, तुझी से प्यार करूँ...

तुझको देखूं, तुझे चाहूँ, तुझी से प्यार करूँ । 

तेरे सिवा न किसी पर भी ऐतबार करूँ ॥ 

तू न आई है, ना आएगी, मेरे मिलने को । 

ये जानकर भी, मै बस तेरा इंतज़ार करूँ ॥

तू पशेमा नहीं होती है, बेवफा होकर । 

मै  वफ़ा करके भी, अपने को शर्मसार करूँ ॥ 

तेरी रातें तो महकती हैं गुलाबों की तरह । 

अपनी रातों को बता कैसे लालाज़ार करूँ ॥ 

नींद उड़ जाए तेरी, जब भी मेरा नाम आये । 

मै  चाहता हूँ तुझे, कुछ  ऐसे बेक़रार करूँ ॥ 

दर्द बढ़ जाता है हद से, जो तेरी यादों का । 

जी में आता है इस दिल को जला दूँ, इसे अंगार करूँ ॥ 

हसरत-ए -वीर यही है मेरे मालिक तुझसे । 

दम-ए -आखिर तलक, चाहूँ मै उसे प्यार करूँ ॥ 

मौलिक व अप्रकाशित 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 12, 2013 at 12:00am

पुरानी रचनाएँ रचनाकार के हृदय के निकट होती हैं. किन्तु, अधबना पकवान भले कितना ही ’प्यारा’ क्यों न हो, कुशल रसोइया उसे समाज के लोगों में नहीं बाँटता. ऐसा कोई प्रयास सीखने के क्रम में सोपान का पायदान मात्र होता है.

शुभ-शुभ

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 11, 2013 at 7:01pm

आदरणीय Dr.Prachi Singh जी बहुत बहुत शुक्रिया ग़ज़ल के भाव समजने और उत्साहवर्धन के लिए ... मैंने अभी अभी सीखना शुरू किया है ये तो बस भावनाओ के प्रवाह थे  जो शब्दों में ढलते चले गये ... ये जाने बगैर की किस विधा में जा रहे हैं । अब सीख रहा हूँ तो समझ आता है कितने ऐब हैं इन रचनाओं में ... मगर जो निकल चुकी हैं उनको सही करता हूँ तो उस वक्त के शक्श की  भावनाएं रूठ जाती है ... पर आप लोगों के आशीर्वाद से सीख जाने के बाद जो रचनाएँ होंगी .. शायद वो त्रुटिमुक्त हो सकें ... पुनः धन्यवाद आपके प्रभावी सन्देश और पथप्रदर्शन के लिये।   


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 11, 2013 at 2:49pm

बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति आ० अनिल चौहान जी 

खूबसूरत भाव ...तदनुरूप प्रवाहित होते जाते सुन्दर शब्द ... सुन्दर कशिश  वाह!

सिर्फ गज़ल का अनुशासित शिल्प भी यदि इसे मिल जाए तो अभिव्यक्ति का सौंदर्य पूर्ण हो जाए 

बहुत बहुत शुभकामनाएँ 

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 11, 2013 at 2:48pm

आदरणीय annapurna bajpai जी बहुत बहुत शुक्रिया उत्साहवर्धन के लिए 

Comment by annapurna bajpai on September 11, 2013 at 1:03pm

बढ़िया , लाजवाब गजल बहुत बधाई आपको । 

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 9, 2013 at 7:00am

आदरणीय  बृजेश नीरज  जी  बहुत बहुत शुक्रिया उत्साहवर्धन के लिए, जहाँ तक मै  सोचता हूँ ये ग़ज़ल ही है या यूँ कहें भावनाओं की अभिव्यक्ति ।  बहर और व्याकरण का बहुत कम ज्ञान है मुझे, यदि आपका आशीर्वाद रहा तो शायद ये भी सीख जाऊं । कोई त्रुटी हो तो ज़रूर आभास कराएँ मुझे ... एक बार फिर आपका शुक्रिया ...   

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 9, 2013 at 6:51am

आदरणीय vijay nikore   जी  बहुत बहुत शुक्रिया उत्साहवर्धन के लिए 

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 9, 2013 at 6:51am

आदरणीय गिरिराज भंडारी  जी  बहुत बहुत शुक्रिया उत्साहवर्धन के लिए 

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 9, 2013 at 6:50am

आदरणीय रविकर   जी  बहुत बहुत शुक्रिया उत्साहवर्धन के लिए 

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 9, 2013 at 6:50am

आदरणीय  Meena Pathak  जी  बहुत बहुत शुक्रिया उत्साहवर्धन के लिए :)

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