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ग़ज़ल : मैं पिता जबसे हुआ चिंतित हुआ

वज्न : २१२२, २१२२, २१२

दूरियों का ही समय निश्चित हुआ,
कब भला शक से दिलों का हित हुआ,

भोज छप्पन हैं किसी के वास्ते,
और कोई शस्य से वंचित हुआ,
              (शस्य = अन्न)
क्या भरोसा देश के कानून पर,
है बुरा जो वो भला साबित हुआ,

नारियों सँग हादसे यूँ देखकर,
मैं पिता जबसे हुआ चिंतित हुआ,

सभ्यता की देख उड़ती धज्जियाँ,
मन ह्रदय मेरा बहुत कुंठित हुआ..

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 1783

Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on September 16, 2013 at 10:39am

आदरणीय अभिनव अरुण भाई जी आपका हृदयतल से हार्दिक आभार आपकी टिपण्णी ने ग़ज़ल को सार्थक किया, आपका सुझाव अत्यंत सुन्दर है आदरणीय यदि नारियों की जगह बेटियां कर दें तो सुन्दरता के साथ साथ स्पष्ठता और अधिक हो जाएगी. आपसे इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा सदैव रहेगी, आशीष एवं स्नेह यूँ ही बनाये रखिये.

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 16, 2013 at 10:36am

हार्दिक आभार आदरणीया अन्नपूर्णा जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 16, 2013 at 10:36am

बहुत बहुत धन्यवाद अखिलेश जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 16, 2013 at 10:36am

आदरणीय आशुतोष सर हार्दिक आभार आपका.

Comment by राज़ नवादवी on September 16, 2013 at 8:53am

हिन्दी तत्सम/तद्भव शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कम ही लोग ग़ज़ल की गरिमा और ओज को बनाए रख सके हैं.... बरबस दुष्यंत की ग़ज़लों का ख़याल हो आया. बधाई हो. 

Comment by vijay nikore on September 16, 2013 at 4:13am

बहुत खूब। बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by वीनस केसरी on September 16, 2013 at 1:46am

अच्छी ग़ज़ल कही है
सारे अशआर पसंद आए ...
मतला थोडा और सरल हो सकता है मिसरों में रब्त कुछ और हो तो लुत्फ़ बढ़ जाए

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 15, 2013 at 11:58pm

बहुत सुंदर भाव, बढ़िया गजल,बहुत बहुत बधाई आदरणीय अरुण अनंत जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on September 15, 2013 at 11:19pm

बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई प्रिय अरुन शर्मा   सभी शेर बढ़िया हुए ये शेर तो दिल में उतर गया ,

नारियों सँग हादसे यूँ देखकर,
मैं पिता जबसे हुआ चिंतित हुआ,....

 

तहे दिल  से दाद कबूलें  हाँ अभिनव जी की बात से मैं भी सहमत हूँ बेटियों ज्यादा अच्छा रहेगा 

Comment by कल्पना रामानी on September 15, 2013 at 8:45pm

नारियों सँग हादसे यूँ देखकर,
मैं पिता जबसे हुआ चिंतित हुआ,....

bahut sundar...

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