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क्यूँ तुझसे मुहब्बत इतनी करता हूँ

तेरी हर बात का  कायल मै  रहता हूँ
क्यूँ तुझसे मुहब्बत इतनी करता हूँ

सितारों संग अकेले बैठता  मै  जब
खुले दिल से तुम्हारी बात करता हूँ

नहीं मुमकिन अगर इस दौर में मिलना
ख्यालों में तुम्हे अपने मै  मिलता हूँ

बहुत सी बात करता में हमेशा जब

तेरा जिक्र खुद -ब -खुद जुबान करता हूँ
.
जुदाई का लम्हा बढता गया अब तो

क्यूँ अब भी मुहब्बत इतनी करता हूँ

मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 26, 2013 at 10:40am

सुन्दर भावाभिव्यक्ति..

प्रयासरत रहें ! शुभकामनाएं 

Comment by वीनस केसरी on September 21, 2013 at 11:02pm

अति सुन्दर प्रयास है ...
शिल्प के प्रति आग्रह प्रयास में और निखार लाएगा ...
मंच की उपादेयता को ग्रहण करें शिल्प आपको ग्रहण करेगा और बात बन जायेगी
शुभकामनाएं

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 21, 2013 at 1:38pm

आदरणीय हिमांशु जी ..बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें 

Comment by MAHIMA SHREE on September 20, 2013 at 8:45pm

बढ़िया आदरणीय बधाई आपको

Comment by रविकर on September 20, 2013 at 2:54pm

बहुत बढ़िया आदरणीय-
शुभकामनायें-

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 20, 2013 at 2:21pm

हिमांशु भाई प्रयास बहुत सुन्दर है प्रयासरत रहें भाव अच्छे हैं बधाई स्वीकारें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 20, 2013 at 7:57am

आदरणीय हिमांशु भाई , अच्छी रचना ,अच्छा प्रयास !!! आपको बधाई !!

Comment by Saarthi Baidyanath on September 19, 2013 at 11:40pm

बहुत बढ़िया ...क्या कहने :)

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 19, 2013 at 11:03pm

बहुत सुंदर रचना , हार्दिक बधाई आदरणीय हिमांशु जी

Comment by annapurna bajpai on September 19, 2013 at 2:06pm

adarniy Himanshu ji sundar aur srthak gazal hetu badhai swikaren .

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