For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नारी अब अबला नहीं, कहने लगा समाज-रविकर

कुण्डलियाँ-


नारी अब अबला नहीं, कहने लगा समाज ।
है घातक हथियार से, नारि सुशोभित आज ।


नारि सुशोभित आज, सुरक्षा करना जाने ।
रविकर पुरुष समाज, नहीं जाए उकसाने ।


लेकिन अब भी नारि, पड़े अबला पर भारी |
इक ढाती है जुल्म, तड़पती दूजी नारी ।|


मौलिक / अप्रकाशित

Views: 806

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 26, 2013 at 3:01pm

आदरणीय रविकर जी 

आज की नारी के विविध चित्र प्रस्तुत करता सुन्दर कुण्डलिया छंद..

क्षमा कीजियेगा आदरणीय एक ही रचना में नारी और नारि थोडा अखर सा रहा है.. शायद सहमत हों 

सादर 

Comment by वेदिका on September 26, 2013 at 12:08am

वाह! भाव पक्ष प्रबल और कला पक्ष सबल!! आदरणीय रविकर जी!

//बैठ वही डाल काटते,//  ---- वही डाल को काटते, आदरणीय लक्ष्मण जी!

Comment by बृजेश नीरज on September 25, 2013 at 9:50pm

वाह! क्या बात है आदरणीय! बहुत ही सुन्दर! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by vijayashree on September 25, 2013 at 3:29pm

लेकिन अब भी नारि, पड़े अबला पर भारी | 
इक ढाती है जुल्म, तड़पती दूजी नारी ।|

बहुत खूब रविकर जी बधाई स्वीकारें 

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 25, 2013 at 12:53pm

वाह क्या कहने आदरणीय बहुत ही सुन्दरता से आपने दोनों पक्षों को प्रस्तुत किया है देखते ही बनता है लाजवाब लाजवाब बधाई स्वीकारें.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 25, 2013 at 11:00am

वाह ! किस सुन्दर ढंग से कुंडलिया छंद के माध्यम से नारी को ही सीख दे डाली आपने बहुत सुन्दर | बधाई रविकर जी 

राक्षस से राक्षस भिड़े, भिड़े देव से देव 

बैठ वही डाल काटते, होता यही सदैव | 

Comment by shalini rastogi on September 24, 2013 at 11:16pm

लेकिन अब भी नारि, पड़े अबला पर भारी | 
इक ढाती है जुल्म, तड़पती दूजी नारी ।|.... वाह आदरणीय रविकर जी .. बिलकुल सत्य कहा आपने , सुन्दर कुंडलिया !

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 24, 2013 at 9:24pm

 बधाई रविकर भाई । सच कहें तो पुरुष वर्ग से ज्यादा  नारी ही नारी की दुश्मन है ।

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on September 24, 2013 at 5:36pm

क्या वेदना जाहिर की है निहायत ही खुबसूरत तरीका है 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 24, 2013 at 5:10pm

बहुत ही सुन्दर आदरणीय बधाई हो बहुत बहुत बधाई हो

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
7 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
21 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service