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ठीक जगह पर देख भाल के बैठा हूँ।
मैं अपनी कुर्सी संभाल के बैठा हूँ।

तीसमारखाँ बहुत बना फिरता था वो ,
मैं उसकी पगड़ी उछाल के बैठा हूँ।

दुष्मन से बदला लेने की खातिर मैं
आस्तीन में साँप पाल के बैठा हूँ।

संसद की गरिमा से क्या लेना-देना ,
संसद में जूता निकाल के बैठा हूँ।

कौन समस्यायें जनता की रोज सुने ,
अपने कान में रूर्इ डाल के बैठा हूँ।

ऐरा गैरा नत्थू खैरा मत समझो ,
सारी दुनिया मैं खंगाल के बैठा हूँ।

मौलिक अप्राकिषत एवं अप्रसारित

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Comment by विजय मिश्र on September 28, 2013 at 12:30pm
सियासी माहौल के माकूल और तन्ज भी तगड़ा कसा है . खूबसूरत रचना के लिए बधाई .
Comment by ram shiromani pathak on September 27, 2013 at 4:49pm

वाह  अवधेश भाई ,  बेहतरीन ग़ज़ल ///बधाई ।

Comment by Jitender Kumar Jeet on September 27, 2013 at 12:39pm

आदरणीय राम अवध जी, बहुत सुन्दर रचना ....मन को भा गई | ढेरों बधाई 

विशेषकर.. 

"संसद की गरिमा से क्या लेना-देना ,
संसद में जूता निकाल के बैठा हूँ।

कौन समस्यायें जनता की रोज सुने ,
अपने कान में रूर्इ डाल के बैठा हूँ। "... ये चार पंक्तियाँ ज्यादा अच्छी लगी  |

Comment by राज लाली बटाला on September 26, 2013 at 6:30pm

बहुत खूब !!

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 26, 2013 at 3:34pm

भ्रस्ट नेता / अफसर की यही सच्चाई है ।  राम अवध भाई बधाई ।

Comment by annapurna bajpai on September 26, 2013 at 12:59pm

कौन समस्यायें जनता की रोज सुने ,
अपने कान में रूर्इ डाल के बैठा हूँ।................ बहुत खूबसूरत , आज के नेताओं पर सीधा प्रहार ,  बहुत बधाई आपको आ0 राम अवध जी । 

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 26, 2013 at 11:08am

आदरणीय राम अवध जी बेहद शानदार ग़ज़ल कही है आपने पढ़कर मजा आया सभी अशआर खूबसूरत बन पड़े हैं गुजारिश है कि यदि ग़ज़ल को बहर के साथ पोस्ट करेंगे तो समझने में आसानी होगी. इस बेहतरीन ग़ज़ल पर दाद कुबूल फरमाएं.

Comment by वीनस केसरी on September 26, 2013 at 4:08am

ठीक जगह पर देख भाल के बैठा हूँ।
मैं अपनी कुर्सी संभाल के बैठा हूँ।

वाह वा क्या कहने ... शानदार मतला ,,, बेहतरीन ग़ज़ल .... ढेरो दाद

Comment by Abhinav Arun on September 26, 2013 at 3:48am

ऐरा गैरा नत्थू खैरा मत समझो ,
सारी दुनिया मैं खंगाल के बैठा हूँ।

 

 ............... समझ गया साहिब वाह कमाल का तेवर है आपका ..इस प्रहारक ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनायें श्री राम अवध जी !

Comment by वेदिका on September 25, 2013 at 11:59pm

निवेदन~ बहर साथ लिख कर दीजिये ताकि ......!

सादर !! 

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