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सिर्फ कानों सुना नहीं जाता

2 1 2 2   1 2 1 2   2 2

सिर्फ कानों सुना नहीं जाता
लब से सब कुछ कहा नहीं जाता

दर्द कि इन्तहां हुई यारों
मुझसे अब यूँ सहा नहीं जाता

देश का हाल जो हुआ है अब
चुप तो मुझसे रहा नहीं जाता

चुन के मारो सभी  दरिन्दों को
माफ इनको किया नहीं जाता

वो खता बार- बार करता है
फिर सज़ा क्यूँ दिया नहीं जाता

है भला क्या तेरी परेशानी
बावफ़ा जो हुआ नहीं जाता

कैसे वादा निभाऊ जीने का
तेरे बिन अब जिया नहीं जाता

संजू शब्दिता मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Meena Pathak on September 27, 2013 at 3:04pm

बहुत सार्थक और सटीक रचना ... बधाई 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 27, 2013 at 1:34pm

आज के माहौल में सटीक है यह  गजल , सब कुछ बर्दाश्त के बाहर हो गया है ।  बधाई आ. संजूजी ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 27, 2013 at 1:10pm

आदरणीया संजू जी , अच्छी गज़ल कही है ,  आपको बहुत बधाई !!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 27, 2013 at 12:51pm

दर्द कि इन्तहां हुई यारों
मुझसे अब यूँ सहा नहीं जाता....यह शेर बहुत पसंदीदा हुआ

लाजवाब गजल प्रस्तुति, बधाई स्वीकारें आदरणीया संजू जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 27, 2013 at 12:43pm

आदरणीया संजू जी ग़ज़ल पर आपका प्रयास बहुत अच्छा है कुछ अशआर बेहद शानदार कहे हैं आपने इस हेतु बधाई स्वीकारें.

वो खता बार- बार करता है
फिर सज़ा क्यूँ दिया नहीं जाता .. आदरणीया यह शेर मुझे अटपटा लगा सजा के साथ जाता कैसे ?

Comment by Saarthi Baidyanath on September 27, 2013 at 12:10pm

कैसे वादा निभाऊ जीने का 
तेरे बिन अब जिया नहीं जाता ...इस शेर के लिए दाद हाज़िर है महोदया ....!..बहुत खूब :)

Comment by रविकर on September 27, 2013 at 11:48am

सुन्दर प्रस्तुति-
आभार आदरणीया-

Comment by रमेश कुमार चौहान on September 27, 2013 at 11:10am

आदरणीया संजू सिंह, कला पक्ष का मुझे ज्ञान नही, भाव पक्ष वाह गजब मजा आ गया । आपको बहुत बहुत बधाई

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