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खयालों में वही पहली नज़र की मस्तियाँ भी थीं



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हुए रुखसत दिले -नादां  की ही  कुछ सिसकियाँ भी थी
खयालों में वही पहली नज़र की मस्तियाँ भी थीं

लहर तडपी थी हर इक याद पे मचला भी था साहिल
ज़माने की वही रंजिश में डूबी किश्तियाँ  भी थीं

बिखरती वो घड़ी बीती न जाने कितनी मुश्किल से
दबी ही थी जो सीने में क़सक की बिजलियाँ भी थीं

कभी कहते थे वो भी उम्र भर यूँ साथ चलने को
चलीं हैं साथ जो अब तक वही गमगीनियाँ भी थीं

भुलाकर यूँ न जी पायेंगे गुजरे वक़्त को हमदम
नहीं भूले हैं जो अब तक, वही बेचैनियाँ भी थीं

अभी तक  याद है वो  कौन सा लम्हा हुआ कातिल
नज़र खामोश थी  औ दिल की कुछ  मजबूरियाँ भी थीं

संजू शब्दिता मौलिक व अप्रकाशित ji

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Comment by Dr.Prachi Singh on October 6, 2013 at 2:37pm

सुन्दर ग़ज़ल हुई है प्रिय संजू सिंह जी 

अभी तक  याद है वो  कौन सा लम्हा हुआ कातिल
नज़र खामोश थी  औ दिल की कुछ  मजबूरियाँ भी थीं...सुन्दर 

हार्दिक बधाई 

Comment by coontee mukerji on October 5, 2013 at 1:24am


अभी तक  याद है वो  कौन सा लम्हा हुआ कातिल
नज़र खामोश थी  औ दिल की कुछ  मजबूरियाँ भी थीं..............बहुत सुंदर

Comment by MAHIMA SHREE on October 4, 2013 at 10:19pm

बहुत ही खुबसूरत गज़ल आदरणीया संजू जी बधाई आपको

Comment by वीनस केसरी on October 4, 2013 at 8:16pm

लौट कर ग़ज़ल के संशोधित रूप को पढ़ना रुचिकर लगा

गुणीजन द्वारा अमूमन सभी दोष इंगित किये गए और अपने ग़ज़ल को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी ...

अक्सर ऐसा होता है कि शुरुआत में ही ग़ज़ल पर विस्तार से टिप्पणी आगे की टिप्पणियों को प्रभावित कर जाती है इसलिए सोचा कुछ रुक के कहा जाए ...

मचला भी था साहिल
को
मचला था साहिल भी ... किया जा सकता है ... वैसे ग़ज़ल में कहन के हवाले से अभी बहुत गुंजाईश है :)))))))))

Comment by विजय मिश्र on October 4, 2013 at 1:26pm
बहुत खूब , बेहतरीन अन्दाज और संजीदा गज़ल .मुबारक हो संजुजी ,
Comment by बृजेश नीरज on October 4, 2013 at 8:33am

वाह! बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल कही है आपने. आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Sushil.Joshi on October 4, 2013 at 7:33am

खूबसूरत गज़ल है आदरणीया संजू जी.....

Comment by sanju shabdita on October 3, 2013 at 11:45pm

प्रथम दृष्टया ग़ज़ल पर बधाई स्वीकारें ...

आगे विस्तार से कुछ कहने के लिए लौट कर आऊँगा ////aadarneeya veenas ji mujhe intzar hai ki aap aayen aur vistar se kuchh kahen ...jisse mai ghazal ko sudhar sakun....abhi mai aapki badhai sweekar karte hue aap ka shukriya ada karti hu...

Comment by sanju shabdita on October 3, 2013 at 11:40pm

aadarneeya sudhijanon ko mera hridaytal se aabhar ..aap sabhi ne meri rachna ka anumodan kiya mai atyadhik aabhari hu.aap sabhi ke sujhawo se nishchay hi meri yah kachchi ghazal purdta ko prapt hogi ..aap sabhi ke sujhawon ka hriday se swagat karti hu....


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2013 at 10:27pm

मतला ही दोषपूर्ण हो गया.. क्यों ?  आपको पता है..

कोशिश अच्छी है. मगर बहुत अच्छी होनी थी न .. :-))))

शुभेच्छाएँ

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