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संवेदनाओं के 

अंतर गुन्जन पर 

भाव लहरियों का 

निःशब्दित नृत्य..

इस ओर से उस छोर 

उस छोर से इस ओर

विलयित तटबन्ध..

लहर लहर मन 

आनंदित 'नील सागर'

मौलिक और अप्रकाशित 

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 12:38pm

आदरणीय शिज्जू शकूर जी 

अभिव्यक्ति को मान देने के लिए बहुत बहुत आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 12:36pm

प्रोत्साहित करती सराहना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 12:36pm

हार्दिक आभार आदरणीय डी पी० माथुर जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 12:32pm

रचना पसंद कर सराह्नात्मक अनुमोदन करने के लिए सादर आभार आ० सुशील जोशी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 2, 2013 at 12:31pm

लहर लहर हम 

आनंदित 'नील सागर'---- और नित नूतन सृजन कमल खिलें उस सागर में 

मन के भावों को अनुपम शब्द मिले ,बहुत बहुत बधाई प्रिय प्राची जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2013 at 12:31pm

अभिव्यक्ति में उकेरा गया शब्द चित्र आपको पसंद आया , यह जानना उत्साहवर्धक है 

 आभार आ० चंद्रशेखर पाण्डेय जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 2, 2013 at 9:28am

अद्भुत, अनुपम रचना, बधाई स्वीकारें आदरणीया डा.प्राची जी

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 2, 2013 at 9:15am

शब्द शब्द खुबसूरत... पूर्ण अभिव्यक्ति....

सादर बधाई स्वीकारें आदरणीया डा प्राची सिंह जी...

Comment by Sarita Bhatia on October 2, 2013 at 9:07am

सुन्दर रचना पर आदरणीया प्राची जी हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 2, 2013 at 7:29am

आदरणीया डॉ प्राची जी ये लग रहा है मानों आपने शब्दों के जरिये नील सागर का एक चित्र ही खींच दिया है,एक एक शब्द लहर की मानिन्द लग रहा है और हर लहर का स्पंदन मैं महसूस कर रहा हूँ,  खूबसूरत प्रवाहमयी रचना के लिये दिलीदाद कुबूल करें

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