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राजकुमार तोते को दबोच लाया और सबके सामने उसकी गर्दन मरोड़ दी... “तोते के साथ राक्षस भी मर गया” इस विश्वास के साथ प्रजा जय जयकार करती हुई सहर्ष अपने अपने कामों में लग गई।
 
उधर दरबार में ठहाकों का दौर तारीं था... हंसी के बीच एक कद्दावर, आत्मविश्वास भरी गंभीर आवाज़ गूंजी... “युवराज! लोगों को पता ही नहीं चल पाया कि हमने अपनी ‘जान’ तोते में से निकाल कर अन्यत्र छुपा दी है...  प्रजा की प्रतिक्रिया से प्रतीत होता है कि आपकी युक्ति काम आ गई... राक्षस के मारे जाने के उत्साह और उत्सव के बीच प्रजा अब स्वयं अपने हाथों से ‘सत्तारानी’ के कक्ष कि चाबी आपको सौंप कर जाएगी...”

राजकुमार के होंठों के साथ ही पूरे दरबार में एक आशावादी मुस्कुराहट नृत्य करने लगी।

____________मौलिक/अप्रकाशित____________

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Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:31am

सादर आभार स्वीकारें आदरणीय भाई  Shubhranshu Pandey जी...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:30am

सादर आभार स्वीकारें आदरणीय Kapish Chandra Shrivastava जी...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:29am

सादर आभार स्वीकारें आदरणीया Dr.Prachi Singh जी...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:28am

सादर आभार स्वीकारें आदरणीया coontee mukerji जी...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:27am

//यह कथा अंत में बहुत बोलती हुई लगी//

यानि कथा में "कथावाचक" के गुण आ गए...हा हा हा...  तय है, आपके संकेत भविष्य में मुझसे ऐसी पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे... :)))

महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शन हेतु अनुज का सादर आभार स्वीकारें... आदरणीय Saurabh Pandey बड़े भईया

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:16am

सादर आभार आदरणीया annapurna bajpai जी...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:15am

सादर आभार आदरणीय बृजेश नीरज जी...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:15am

सादर आभार आदरणीय  Sushil.Joshi जी...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:14am

सादर आभार आदरणीय गिरिराज भण्डारी जी...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on October 14, 2013 at 11:12am

सादर आभार आदरणीया मीना पाठक जी...

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