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Kapish Chandra Shrivastava
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  • शिज्जु "शकूर"
 

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Kapish Chandra Shrivastava commented on अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's blog post माँ जैसी प्यारी है मौत (गीत) अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव
"आदरणीय बड़े भाई , अवश्यम्भावी  मृत्यु की सत्यता के विषय में बहुत ही सही बात कही है आपने |" माँ जैसी प्यारी है  मौत "  कविता के लिए आपको बहुत बहुत बधाई | इसे पढ़ कर " अज़ीज़ नाज़ा " की गाई हुई मृत्यु के बारे में मशहूर…"
Dec 2, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's blog post भिखारिन (हास्य व्यंग्य) अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव
"आदरणीय बड़े भाई , क्षमा कीजिएगा ,  व्यक्ति के पहनावे अथवा व्यक्तित्व में समय और काल  के अनुसार  परिवर्तन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है | और इस क्रिया में लिंग का कोई भेद नहीं रहा है | नहीं तो हम और आप आज भी अपना शशीर पत्ते और जानवर के चमड़े…"
Nov 28, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on Sushil.Joshi's blog post गीत (पृष्ठ ह्रदय के जब मैं खोलूँ)
"    आदरणीय सुशील  भाई जी ।  इतनी बढ़िया श्रृंगार रस की रचना है आपकी ,कि मेरे पास प्रशंशा करने को शब्द कम पड़  रहे हैं । हर पद हर पंक्ति एक से बढ़कर  एक । शुरू की ही दो  पंक्तियाँ  पढते ही…"
Oct 15, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on Neeraj Neer's blog post रावण, रावण को आग लगाये
"    आदरणीय नीरज कुमार जी , बहुत बढ़िया  रचना है आपकी । लोभ,मोह ,भ्रष्टाचार ----- इत्यादि गंदगियों के साथ बजबजना शब्द बड़ा सार्थक लगा । सच कहा है आपने राम या राम जैसे व्यक्तित्व वालों को ही रावण जलाने का अधिकार है । अनेकों बधाई…"
Oct 14, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post सहारा
"      आदरनी चंद्रेश जी । काफी प्रभावोत्पादक कहानी है आपकी । अंत तक उत्सुकता बनी रहती है । इस प्रेरणा दायक कथा के लिए मेरी बधाई स्वीकारें । "
Oct 14, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on गिरिराज भंडारी's blog post बोलो किसको राम कहूँ मै ( गीत ) गिरिराज भंडारी
"   गिरिराज , बहुत बढ़िया बहुत अर्थ पूर्ण और सामयिक गीत रचा है तुमने । बहुत बहुत बधाई । "
Oct 14, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post दिल में हमारे कैसे ये तूफ़ान जिन्दा रह गया
"आदरणीय मिश्रा जी बहुत सुन्दर और भावपूर्ण गज़ल है आपकी । ग़ज़ल की तकनीकी बातों से अनभिज्ञ हूँ अतएव  केवल ग़ज़ल के भावों  को समझने तक ही सीमित रहता हूँ । आपको बहुत-बहुत बधाई । "
Oct 14, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव's blog post सार्थक दशहरा (कविता)-अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव
"आदरणीय  भाई  जी , बहुत बढ़िया कविता  है आपकी । सच मुच , हर साल रावण मारने के बाद भी अन्दर का रावण नहीं मरता । जिसे मारने की जरूरत पहले है । कविता  का हर पद प्रशंशनीय है ।  बहुत बहुत बधाई आपको ।   "
Oct 14, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post लघुकथा : गिफ्ट (गणेश जी बागी)
"   वाह !!! क्या बात है । बहुत बढ़िया लघु कथा आपने लिखी है गणेश जी । बहुत कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह दिया है आपने । बहुत बहुत बधाई । "
Oct 14, 2013
Kapish Chandra Shrivastava commented on वीनस केसरी's blog post लघु कथा - मजदूर
"  आदरनीय  केसरी जी , आपने चार ही लाइन में काफी कुछ कह दिया है । बहुत बढ़िया लघु - कथा । आपको बहुत बहुत बधाई । "
Oct 13, 2013
Kapish Chandra Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 36
"  बहुत बढ़िया रचना है आदरणीय बृजेश जी । बहुत गहरी  बात कह दी है आपने । आज का कटु सत्य है --- "  किलकारियों से गूंजने वाले आँगन में ,अब हर तरफ है प्रितिध्वनियों की सायं-सायं "।   और भी -- -- " दिन भर जलने वाले…"
Oct 12, 2013
Kapish Chandra Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 36
"                 आदरणीय सुशील जोशी जी , आपको किस मुह से बधाई दूं ? परम्परा के निर्वहन का कितना सुन्दर अर्थ [ कुअर्थ ]  लगाया है बेटे ने  !!!!  आपने इतने  गंभीर विषय को हास्य-व्यंग…"
Oct 12, 2013
Kapish Chandra Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 36
"  आदरणीय सौरभ पांडे जी , छंद पढ़ते  समय मन में सहसा एक विचार कौंधा । लिखने से अपने को रोक नहीं सका । प्रशंशा के लिए सादर धन्यवाद । "
Oct 12, 2013
Kapish Chandra Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 36
"              अखिलेश भैया , अपनी परम्पराओं से विलग होकर आजकल के जीवन का बहुत सुन्दर चित्रण किया है आपने । आपको बहुत बहुत बध्हाई ।  "
Oct 12, 2013
Kapish Chandra Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 36
"   गिरिराज , बहुत सुन्दर  आदर्श परिवार और उनके मूल्यों का बढ़िया वर्णन किया है अपने दोहे में । बधाई । "
Oct 12, 2013
Kapish Chandra Shrivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 36
"              बहुत ही सुन्दर रचना है अरुण कुमार जी आपकी । सब पंक्तिया अपने  आपने में पूरी कहानी कहती हुई । " अंडे से चूजे  ना  निकले ,चले घोंसला अपना छोड़ ।  " वाह !!!! बहुत बढ़िया…"
Oct 12, 2013

Profile Information

Gender
Male
City State
Durg [ Chhattisgarh ]
Native Place
Khairagarh
Profession
Retd. Engineer
About me
-------

Kapish Chandra Shrivastava's Blog

प्रत्युत्पन्नमति [ लघु-कथा ]

तनु और मान्या  दोनों  किचन में नाश्ते  की तैयारी कर रहे  थे  । रवि और अल्पना, तनु के  भैया -भाभी ,  ड्राइंग रूम में बैठे  टी. वी. देख रहे थे।  अचानक किचन से  छनाक की आवाज  सुनकर दोनों किचन की ओर  दौड़ पड़े । देखा टोमेटो केचप का नया बाटल फर्श पर चूर-चूर पड़ा है, सारा केचप बिखर गया था। तनु !!!!!  गरजता हुआ  रवि गुस्से से चिल्ला पड़ा - सम्हालकर काम नहीं कर सकती, पूरा केचप  बर्बाद कर दिया , कल ही लाया था 150 रु. में । घबराहट के  कारण तनु बोली " वो भैया मै मै --- उसके …
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Posted on October 6, 2013 at 5:00pm — 35 Comments

विडम्बना (लघु-कथा)

चप्पल   घिस-घिस कर आधे रह गए थे सूरज शर्मा के । पिछले 3 साल से अपनी मास्टर  डिग्री की फ़ाइल प्लास्टिक के थैले में रखे नौकरी की तलाश में  जगह-जगह धक्के और ठोकरें खाते घूम जो रहा था । मई महीने की दोपहरी थी ।  दैनिक पत्रिका के  " वान्टेड " वाले पृष्ठ में कई जगह पेन से गोल  घेरा लगाए  सूरज पिछले चार घंटे  से शहर के  चक्कर लगाते भूख प्यास से बेहाल हो चुका था । शाम  तक  2-3  इंटरव्यू और देना था उसे । बची-खुची हिम्मत जुटा , सिटी…

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Posted on October 5, 2013 at 10:30am — 37 Comments

जीवन संघर्ष - एक कहानी

                              और एक दिन  रामदीन  सचमुच  मर गया । आदर्श  कालोनी  में किसी के भी चेहरे पर दुःख का कोई भाव नहीं था । होता भी क्यों ? रामदीन था ही कौन जिसके  मर जाने पर उन्हें दुःख होता  । रामदीन तो इस कालोनी में रहते हुए भी इस कालोनी का नहीं था । सबके साथ रहते हुए भी  वो और उसका छोटा सा परिवार  अपनी  झोपड़ी में सबसे तनहा रहा करते थे । उसकी मौत से  यदि कोई दुखी थे ,  तो वो थी  फागो - रामदीन की घरवाली ,  उसका  एक  बच्चा टिल्लू, टिल्लू के बगल में बैठा मरियल कुत्ता मोती और टूटे…
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Posted on October 4, 2013 at 9:30am — 24 Comments

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At 5:25pm on October 3, 2013,
सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी
said…

स्वागत है बड़े भाई !!!!!

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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