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ग़ज़ल - सबकी नज़रों में सुनहरी भोर होनी चाहिए

ग़ज़ल –
2122 2122 2122 212

सबकी नज़रों में सुनहरी भोर होनी चाहिए,
रोज कोशिश रोशनी की ओर होनी चाहिए |

आसमां जा कर पतंगें भूल जाती हैं धरा,
आपके हाथों में उनकी डोर होनी चाहिए |

हो ग़ज़ल ऐसी कि, जैसे लुत्फ़ की परतें खुलें,
शाइरी गन्ने की मीठी पोर होनी चाहिए |

इश्क का जज़्बा इबादत से बड़ा हो जाएगा,
शर्त ये है आशिकी पुरजोर होनी चाहिए |

ज्ञान गीता का भले काम आएगा संग्राम में ,
कृष्ण की नज़रें मगर चितचोर होनी चाहिए |


तोड़ सकता है अदब सौ मुश्किलों के भी कवच,
हर कलम पैनी नुकीली ठोर होनी चाहिए |

कोई पश्चाताप की बातें करे तो देखना ,
आँख में उसकी ढलकती लोर होनी चाहिए |

जबकि आँखें बंद होने को हों मेरे रूबरू,
माँ तेरे आँचल की स्वर्णिम कोर होनी चाहिए |

देखना जब भी तो उसकी सीरतों को देखना,
ये न हो सूरत ही उसकी गोर होनी चाहिए |

 

 

* सर्वथा मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Abhinav Arun on October 16, 2013 at 5:32am

आपके आशीर्वाद से अभिसिंचित हो समृद्ध हुआ आदरणीय सादर प्रणाम , स्नेह वर्षा फेलिंन बनकर सदा इस और आये ..यही कामना है :) !!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 15, 2013 at 11:47pm

आसमां जा कर पतंगें भूल जाती हैं धरा,
आपके हाथों में उनकी डोर होनी चाहिए |

वाह !

फिर एक एक कर सारे अश’आर देखता गया हूँ.

बहुत-बहुत बधाई.

Comment by Abhinav Arun on October 8, 2013 at 9:46am

आदरणीय श्री नीरज जी स्वागत और ह्रदय से आभार आपका !

Comment by Abhinav Arun on October 8, 2013 at 9:46am

आदरणीया डॉ प्राची जी अनुमोदन और बधाई के लिए हार्दिक आभार आपका !

Comment by बृजेश नीरज on October 7, 2013 at 8:21pm

बहुत ही सुन्दर और लाजवाब ग़ज़ल हुई है! आपको ढेरों बधाई!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 7, 2013 at 7:57pm

आ० अभिनव अरुण जी 

बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है...

इस शेर ने तो बस कमाल ही कहा है..

आसमां जा कर पतंगें भूल जाती हैं धरा,
आपके हाथों में उनकी डोर होनी चाहिए |......बहुत खूब 

दिल से बधाई प्रेषित है. सादर 

Comment by Abhinav Arun on October 7, 2013 at 4:01pm

शह्र वाली बोन्साई ख़ूब है पर ज़हन में ,

गाँव के बरगद की पुख्ता सोर होनी चाहिए |

                   ... ये एक शेर इसी सिलसिले में हुआ है ...कल एक गोष्ठी में'' आँचल के कोर ''पर कुछ लोगों ने मशवरा दिया सो उसके स्थान पर ये कहा है !

Comment by Abhinav Arun on October 7, 2013 at 3:51pm

शेर आपको पसंद आये आभारी हूँ आदरणीया कुंती जी . सादर अभिवादन आपका !!

Comment by Abhinav Arun on October 7, 2013 at 3:50pm

दिल से शुक्रिया आपका आदर्नेया अन्नपूर्णा जी , स्नेह मिलता रहे रचनाओं को यही कामना है !

Comment by Abhinav Arun on October 7, 2013 at 3:50pm

आभार आदरणीय अरुण निगम जी ..अभी आपकी लघु कथा पढ़कर आ रहा हूँ ...वाह क्या कहने ..सशक्त ...आभार स्नेह के लिए आदरणीय !

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