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दिल में हमारे कैसे ये तूफ़ान जिन्दा रह गया

दिल के बिना जैसे कोई नादान जिन्दा रह गया

वैसे हो बेघर इक हसीं अरमान जिन्दा रह गया 

 

है आदमी ही आदमी की जान का दुश्मन हुआ

यारों खुदा का है करम इंसान जिन्दा रह गया

 

टूटा हमारा  हौसला उम्मीद फिर भी थी जवां

रख आरजू जीने की ये बेजान जिन्दा रह गया

 

मेरे खुदा मुझ पर तेरा रहमो करम हरदम रहा

तूफ़ान में अदना सा ये इंसान जिन्दा रह गया

 

लगते रहे हर रोज ही इल्जाम तो हम पर बड़े  

माँ की दुआओं से मेरा सम्मान जिन्दा रह गया 

 

होता नहीं था हम पे तो दीवानगी का कुछ असर

दिल में हमारे कैसे ये तूफ़ान जिन्दा रह गया 

 

नाजुक  हसीं गुल की हँसी उतरी थी दिल में जिस घड़ी

दिल में उसी पल से हसीं मेंहमान जिन्दा रह गया 

डॉ आशुतोष मिश्र 

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2013 at 6:55pm

इस ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारिये आदरणीय

सादर

Comment by MAHIMA SHREE on October 15, 2013 at 10:49pm

मेरे खुदा मुझ पर तेरा रहमो करम हरदम रहा

तूफ़ान में अदना सा ये इंसान जिन्दा रह गया....

उम्दा प्रस्तुति आदरणीय .. बधाई आपको

Comment by बृजेश नीरज on October 15, 2013 at 7:32pm

बढ़िया ग़ज़ल हुई है! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 15, 2013 at 1:16pm

बहुत ख़ूब .. बधाई 

Comment by devraj on October 15, 2013 at 10:13am

बहुत बढ़िया मजा आ गया सर जी 

Comment by Sushil.Joshi on October 15, 2013 at 5:11am

शानदार गज़ल प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई डॉ. आशुतोष जी...

Comment by वीनस केसरी on October 15, 2013 at 4:01am

अरुण अनंत भाई आप किस मिसरे की ओर इंगित कर रहे हैं, ???
मुझे तो सभी मिसरैन बहर के हवाले से दुरुस्त दिखाई पड़ते हैं ...........

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 14, 2013 at 3:36pm

मेरे खुदा मुझ पर तेरा रहमो करम हरदम रहा

तूफ़ान में अदना सा ये इंसान जिन्दा रह गया.....वाह! बहुत सुंदर

लगते रहे हर रोज ही इल्जाम तो हम पर बड़े  

माँ की दुआओं से मेरा सम्मान जिन्दा रह गया......यह बहुत पसंदीदा हुआ

बहुत लाजवाब गजल, दिली दाद कुबूल कीजिये आदरणीय डा. आशुतोष जी

 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 14, 2013 at 3:22pm

आदरणीय अरुण जी ..बहुत कोशिस की थी फिर भी चूक हो गयी ..मैं सम्बंधित भूल ठीक करूँगा ..बस ऐसे ही आप सब का सहयोग मिलता रहे ..सादर धन्यवाद केसाथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 14, 2013 at 3:18pm

आदरनीय अखिलेश जी ..हौसला अफजाई के लिए हार्दिक धन्यवाद 

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