For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे अपने उधारी दे के ऋण को छोड़ देते हैं

मेरे अपने उधारी दे के ऋण को छोड़ देते हैं

मगर फिर नास्ते का दाम उसमें जोड़ देते हैं

 

चलाते योजना अक्सर वो अपने जेब भरने को  

सियासी हैं बड़े नदियों का रुख भी मोड़ देते हैं

 

जो हैं कमजोर दुनिया में करें वो ज्ञान की बातें

बहादुर हैं जो हाँ करवाने सर ही फोड़ देते हैं

 

करे हैं जोंक सी यारी लिपट के यार मतलब से

निकल जाता है जब मतलब वो यारी तोड़ देते हैं

 

हवाएं जब करें साजिश चटक जाते हैं तब फानूश

तमस से जंग लड़ना दीप भी तब छोड़ देते हैं

.........दीप...........

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 486

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil.Joshi on October 24, 2013 at 7:28pm

वाह... क्या बात है आ0 संदीप भाई.... कई मामलों पर एकदम सटीक बैठती इस प्रस्तुति हेतु बधाई....

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on October 21, 2013 at 11:22pm

एक दम सच्चाई से रूबरू करवाती इस रचना पर ढेरो बधाईयाँ आपको |

Comment by annapurna bajpai on October 21, 2013 at 6:44pm

वाह !! बढ़िया भावों से सुसज्जित गजल हेतु बधाई स्वीकारें आ0 संदीप जी । 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 21, 2013 at 12:24pm

सुंदर भावों के इस ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई स्वीकारें ..सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 20, 2013 at 10:29am

मेरे अपने उधारी दे के ऋण को छोड़ देते हैं

मगर फिर नास्ते का दाम उसमें जोड़ देते हैं....वाह! बहुत सटीक बात

बेहतरीन गजल पर दिली दाद कुबूल कीजिये आदरणीय संदीप जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 20, 2013 at 10:09am

अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय संदीप जी बधाई स्वीकार करें

Comment by coontee mukerji on October 20, 2013 at 1:13am

मेरे अपने उधारी दे के ऋण को छोड़ देते हैं

मगर फिर नास्ते का दाम उसमें जोड़ देते हैं.....बहुत खूब.

 

Comment by Abhinav Arun on October 19, 2013 at 6:24pm

सुन्दर सशक्त अश आर हार्दिक बधाई संदीप जी बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 19, 2013 at 6:17pm

आदरनीय सन्दीप भाई , उम्दा गज़ल कही है आपको हार्दिक बधाई !!!!!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 19, 2013 at 5:33pm

जो हैं कमजोर दुनिया में करें वो ज्ञान की बातें

बहादुर हैं जो हाँ करवाने सर ही फोड़ देते हैं

मिसरा सानी कुछ अटक सा रहा है, इसे अगर यूँ कहें तो  ……… 

बहादुर हैं जो करवाने को हाँ सर फोड़ देते हैं

बाकी के सभी अशआर मस्त मस्त लगें , बहुत बहुत बधाई प्रिय संदीप भाई । 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
2 hours ago
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
May 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service