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उचित निर्णय युक्त बनाना

सुधरे जो बनते हैं सबके अपने,
निशदिन दिखाते हैं नए सपने,
ऊपर-ऊपर प्रेम दिखाते,
भीतर सबका चैन चुराते,
ये लोगों को हरदम लूटते रहते हैं;
तब भी उनके प्रिय बने रहते हैं.
**************************************************
ये करते हैं झूठे वादे,
भले नहीं इनके इरादे,
ये जीवन में जो भी पाते,
किसी को ठग के या फिर सताके
ये देश को बिलकुल खोखला कर देते हैं;
इस पर भी लोग इन पर जान छिड़कते हैं.
*******************************************************
जब तक ऐसी जनता है,
तब तक ऐसे नेता हैं,
जिस दिन लोग जाग जायेंगे,
ऐसे नेता भाग जायेंगे,
अब यदि चाहो इन्हें हटाना,
चाहो उन्नत देश बनाना,
सबसे पहले अपने मन को,
उचित निर्णय युक्त बनाना.
*****************************उचित निर्णय युक्त बनाना.

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 12, 2011 at 6:19pm
शालिनी जी, बहुत ही विचारोतेजक रचना है , या यह कहे की तीखा प्रहार है आज के दोमुहों पर , बेहतरीन अभिव्यक्ति , बधाई स्वीकार करे , पुनः आपकी रचनाओं का इन्तजार रहेगा |
Comment by Ratnesh Raman Pathak on January 12, 2011 at 6:07pm
आपकी यह कविता अच्छी प्रहार कर रही है ,भ्रष्ट नेतावों पर जो भ्रष्टाचार के गंगोत्री में आज भी दुबकी लगाने से अच्छा कुछ भी नहीं समझते .खैर,भगवान करे यह श्रेष्ठ सन्देश लोगो के दिल तक जाये और उचित निर्णय उक्त बनाये !बहुत बहुत धन्यवाद आपको शालिनी जी.

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