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दोहे : अरुन शर्मा 'अनन्त'

कोमल काया फूल सी, अति मनमोहक रूप ।
तेरे आगे चाँद भी, लगता मुझे कुरूप ।।

भोलापन अरु सादगी, नैना निश्छल झील ।
जो तेरा दीदार हो, धड़कन हो गतिशील ।।

गेसू लगते आपके, ज्यों रेशम की डोर ।
बिखरें काली रात हो, सुलझें होती भोर ।।

अधर पाँखुरी पुष्प से, कोमल गाल गुलाब ।
तुमको पाकर हो गया, पूरा दिल का ख्वाब ।।

ज्यों झूमर से घर सजा, त्यों झुमकें से कान ।
आभूषण ही लाज का, नारी का सम्मान ।।

खन खन खनके चूड़ियाँ, हरी गुलाबी लाल ।
मेरी हर इक चाह का, रखतीं सदा खयाल ।।

छम छम छम पायल बजे, लूटे चैन करार ।
ईश्वर से इतनी दुआ, अमिट रहे यह प्यार ।।

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by गिरिराज भंडारी on October 23, 2013 at 9:48pm

आदरणीय अरुण भाई , नारी रूप की सुन्दरता बयाँ करती आपके सभी दोहे लाजवाब हैं , बहुत बधाई !!!!

छम छम पायल बजे, लूटे चैन करार । ----------- प्रथम पद मे मात्रा 11 होरहा है , एक बार छम और जोड़ दें तो सही होजायेगा !!!!!!

Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on October 23, 2013 at 9:16pm

कंचन काया फूल सी, अति मनमोहक रूप ।
तेरे आगे चाँद भी, लगता हमें कुरूप ।।

भोलापन अरु सादगी, नैना निश्छल झील ।
जो तेरा दीदार हो, धड़कन हो गतिशील ।।

अरुण जी ....कंचन काया फूल सी....इस लाइन में क्या विरोधाभास बात कह दी आपने कंचन काया भी है और  फूल भी है यानि कि कठोर के साथ नरम भी .....खैर आपके दोहे ह्रदय को छूने वाले हैं ...बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by ram shiromani pathak on October 23, 2013 at 8:38pm

कंचन काया फूल सी, अति मनमोहक रूप ।
तेरे आगे चाँद भी, लगता हमें कुरूप ।।वाह भाई

"हमें" की जगह यदि "मुझे" कर दिया जाय तो ???


बहुत ही सुन्दर व् मनमोहक दोहे रचे है अपने आदरणीय भाई अरुण जी //हार्दिक बधाई आपको //सादर

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 23, 2013 at 8:02pm

सौंदर्य का सुंदर वर्णन   बधाई अरुन भाई ।

छम छम पायल बजे ///  छम छम बजे पायलिया ........ सादर  ।

 

Comment by रमेश कुमार चौहान on October 23, 2013 at 7:28pm

आदरणीय शर्माजी बडे ही मनमोहक दोहे रचे है आपने बधाई

कृपया ध्यान दे...

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