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ये जो पुराना दरख्त है 

इससे बहुत पुराना संबंध है 

पंक्षी भी अब रात गुजारने  नहीं आते

आते हैं कुछ देर ठहर के चले जाते 

इसे अब पानी भी अब कोई नहीं देता

अब तो इसकी कोई छांव भी नहीं लेता

बड़ी रौनक थी आँगन मे इसकी 

बड़ी चमक थी चेहरे पे इसकी 

बूढ़ा दरख्त इसे याद करके काँप गया ... 

इक थरथर्राहट सी करी ....

और शांत हो गया 

ये जो पुराना दरख्त है ... 

इससे बहुत पुराना संबंध हैं .... ।

"मौलिक व अप्रकाशित"दी

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Comment

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Comment by Meena Pathak on October 24, 2013 at 4:08pm
पुराना दरख्त :) .. सुन्दर रचना बधाई आप को

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 24, 2013 at 2:28pm

पूरना दरख़्त क्या होता है भाईजी.. .?

शुभ-शुभ

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