For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सपने

कुछ सपने केवल सपने ही रह जाते हैं 

बिना पूरे हुये, बिना हकीकत हुये 

और हमे वो ही अच्छे लगते हैं 

अधूरे सपने, बिना अपने हुये 

हम जी लेते हैं 

उसी अधूरेपन को 

उसी खालीपन को 

सपने की चाहत में

जानते हुये भी ....

सपने तो सपने हैं 

सपने कहाँ अपने हैं 

यथार्थ को छोड़कर 

परिस्थिति से मुह मोड़कर 

हम जीते हैं सपने में 

सपने हम रोज देखते हैं 

कुछ ही सपनो को हम जीते हैं 

बाकी सपने सपने ही रह जाते हैं 

सपने तो सपने हैं ... 

वो कहाँ अपने हैं .... 

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 402

Facebook

You Might Be Interested In ...

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 30, 2013 at 9:51am

आदरणीय आमोद श्रीवास्तव जी 

सुन्दर कथ्य है प्रस्तुति का.. स्वप्न तो स्वप्न ही हैं ...अधूरे स्वप्न भी हमें स्वीकार्य होते हैं, क्योंकि अजीज होते हैं.

सब सपनों को न जी सकने का दर्द और स्वप्नों का पूरा न होने को स्वीकारती इस अभिव्यक्ति के लिए बधाई.

वैसे कहीं कहीं गद्यात्मकता / सपाटबयानी से बचा जा सकता था... अतुकांत रचनाओं में यही सबसे बड़ा चैलेन्ज होता है.

शुभकामनाएं 

Comment by Sushil.Joshi on October 24, 2013 at 9:27pm

बहुत खूब आ0 अमोद जी..... एक सार्थक रचना हेतु बधाई....

Comment by Amod Kumar Srivastava on October 24, 2013 at 6:38am

आदरणीय जितेंद्र जी, बृजेश जी, मीना पाठक जी, अन्नपूर्णा जी, अखिलेश जी, गिरिराज जी, अरुण शर्मा जी आप सभी को बहुत बहुत आभार ... मेरा उत्साहवर्धन के लिए..... 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 23, 2013 at 11:51pm

जीवन की वास्तविक व् कड़वे सच का, चित्रण करती खुबसूरत पंक्तियों पर, बहुत बहुत बधाई आदरणीय अमोद जी

Comment by बृजेश नीरज on October 23, 2013 at 10:29pm

अच्छी रचना है!

Comment by Meena Pathak on October 23, 2013 at 6:51pm

हम जी लेते हैं 

उसी अधूरेपन को 

उसी खालीपन को 

सपने की चाहत में

जानते हुये भी .........बहुत सुन्दर रचना | सादर बधाई स्वीकारें 

Comment by annapurna bajpai on October 23, 2013 at 6:44pm

सुंदर रचना आ0 आमोद जी बधाई आपको । 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 23, 2013 at 4:00pm

आमोद भाई सपने की बधाई । सपना यदि सच होता जाये, जीना भी दूभर हो जाये ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 23, 2013 at 2:20pm

आदरणीय आमोद भाई , सुन्दर जीवन दर्शन !!!! आपको बधाई !!!

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 23, 2013 at 12:47pm

आदरणीय आमोद जी वास्तविकता को दर्शाती सुन्दर रचना हेतु बधाई स्वीकारें

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service