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वो कौन है,

 

अतीत जैसा पास है,

या कि मेरा आज है,

व आगे का एहसास है|

मैं फंसा इन उलझनों में, सोचता,

वो कौन है|

 

जो गा सकूँ वो गान है,

कि मिला सकूँ वो तान है,

या कि मेरा सम्मान है|

ये सुलझ जाए पहेली, जान लूँ,

वो कौन है|

 

मधुरव भरा वो साज है,

या कि नवोढ़ा लाज है,

मेरे लिए क्यूँ राज है?

एक रूप सदिश बने तब, कह सकूँ,

वो कौन है|

 

गुल है वो कि बाग़ है,

धुन कोई या राग है,

या ओस है कि आग है|

सुन्घू कि गाऊं या जलूं, अज्ञात कि,

वो कौन है|

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Comment

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Comment by Bhasker Agrawal on January 20, 2011 at 4:29pm
सुन्दर प्रस्तुति ..बधाई
Comment by Santosh Kumar on January 20, 2011 at 3:47pm

  Bhut hi uttam

sundar rachana

saduvad

Comment by Veerendra Jain on January 20, 2011 at 3:41pm
bahut hi ache khayalat hain..Ashish ji..vaise  ' wo kaun hai' jiske liye ye rachna likhi gayi hai!!!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 13, 2011 at 8:36pm

मधुरव भरा वो साज है,

या कि नवोढ़ा लाज है,

मेरे लिए क्यूँ राज है?

एक रूप सदिश बने तब, कह सकूँ,

वो कौन है|

 

बहुत बढ़िया, अच्छी कविता है , पहले स्टेंजा मे थोडा ध्यान दे , शायद एक पक्ति की कमी महसूस हो रही है , बाकी मजेदार है, जय हो !

कृपया ध्यान दे...

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