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ज्योतिपर्व की रात में ,करो तिमिर का नाश!

सच ही जीता है सदा ,ऐसा हो विश्वास !!

शांतिदीप घर घर जले ,समय तभी अनुकूल !
आपस में सौहार्द हो,कटुता जाओ भूल !!

ज्योतिपर्व की रात में ,तुम्हे समर्पित तात !
जीवन यूँ जगमग रहे ,दीपों की सौगात!!

मन में शुभ संकल्प लो,हाँथो में ले दीप !
अंतस का कल्मष छटे ,मन का आँगन लीप !!

मन का अँधियारा छटे,कटे दम्भ का जाल !
पहनाओ कुछ इस तरह ,दीपों की इक माल !!

ज्योतिपर्व फिर आ गया ,लेकर शुभ सन्देश !
अँधियारा न दिखे कहीं ,फूले फले स्वदेश !!

जगमग करता ही रहे ,यह प्यारा संसार !
अँधियारे को त्यागकर ,भरो ज्योति भण्डार !!
***********************************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment

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Comment by ram shiromani pathak on November 13, 2013 at 6:22pm

 बहुत बहुत आभार आपका आदरणीया वंदना  जी ..... सादर  

Comment by vandana on November 13, 2013 at 6:48am

वाह !! आदरणीय राम शिरोमणि जी  सुन्दर दोहे 

Comment by ram shiromani pathak on November 13, 2013 at 1:05am

इस अमूल्य सुझाव  के  लिए  बहुत  बहुत  आभार आपका आदरणीय सौरभ  जी........।सादर  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 12, 2013 at 11:06pm

सुन्दर दोहावलि प्रयास अच्छा लगा.

सटीक और सार्थक सुझाव मिलें हैं. अवश्य सोचें कि ऐसे सुधारों से रचनाकर्म में क्या अंतर आ जायेगा. 

बधाई

Comment by ram shiromani pathak on November 9, 2013 at 8:24pm

बहुत बहुत आभार भाई सुशिल जोशी जि।सादर  

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 11:58am

वाह वाह.......  बेहद खूबसूरत दोहावली है आ0 राम भाई...... बाकी आ0 प्राची जी के विचारों से आपकी सहमति हमें आने वाले समय में और भी अधिक सुंदर प्रस्तुति पाने का सूचक है..... बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ.....

Comment by ram shiromani pathak on November 6, 2013 at 10:34pm

यह तो आपकी महानता है भाई बृजेश जी। ....... सादर

Comment by बृजेश नीरज on November 6, 2013 at 8:03pm

मेरे कहे को मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार भाई जी!

Comment by ram shiromani pathak on November 6, 2013 at 7:59pm

इस अमूल्य सुझाव के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई बृजेश जी। .......सादर

Comment by ram shiromani pathak on November 6, 2013 at 7:58pm

"""प्रस्तुतियां यदि उपदेशात्मक की जगह आचरणात्मक रूप में प्रस्तुत हों तो ज्यादा प्रभावशाली होती हैं..""""

आप सर्वथा उचित कह रही है …मुझे भी ऐसा विचार आया लेकिन पोस्ट कर चुका था...........
आपके सुझाव से बहुत सुधार हो गया

आपका अनुमोदन पाकर आपार हर्ष हुआ। …और  इस अमूल्य  सुझाव के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीया प्राची  जी। .......सादर 

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