For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मंदिरों में है बसेरा मस्जिदों में घर तेरा

मंदिरों में है बसेरा मस्जिदों में घर तेरा 
ऐ परिन्दा बोल आख़िर कौन है रहबर तेरा ?

तेरे ज़ख्मों को भरेगा कौन ऐ हिन्दोस्तां ?
मुददतों से है पड़ा बीमार चारागर तेरा 

अम्न के दुश्मन ने फिर ओढ़ा है चाँदी का नक़ाब 
हो न जाये बेअसर इस बार भी पत्थर तेरा 

इस तरफ मोहताज टूटी खाट को आम आदमी 
उस तरफ मख़मल पे सोता है हर इक नौकर तेरा

सोच दिल पे हाथ रखकर ऐ वतन के नौजवां 
हादसों के बाद क्यों आता है नाम अक्सर तेरा

.

"मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 769

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 18, 2013 at 7:54pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है आ० सुशील जी 

हर एक शेर लाजवाब है...हार्दिक बधाई इस ग़ज़ल पर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 17, 2013 at 12:56pm

आदरणीय सुशील जी बहुत ही उम्दा गजल पेश की है आपने बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by वीनस केसरी on November 17, 2013 at 3:30am

वाह वा कमाल की ग़ज़ल है एक एक शेर पर ढेरो दाद

"परिंदे" सौरभ जी इंगित कर चुके हैं ,, मैं भी यही कहने वाला था


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 16, 2013 at 9:35pm

हर शेर पर दिल से दाद दे रहा हूँ, आदरणीय सुशीलजी. कई शेर अलबत्ता सामान्य बातें साझा करते दीख रहे हैं, लेकिन क्या क़ायदे से कहते दीख रहे हैं ! ग़ज़ल से गुजरना भला लगा है.

यह अवश्य है कि आप अपनी ग़ज़ल के मिसरों का  वज़्न प्रारम्भ में ही उद्धृत कर दें. 

जैसे इस ग़ज़ल के मिसरों का वज़्न  २१२२ २१२२ २१२२ २१२  है.

और,

ऐ परिन्दा बोल आख़िर कौन है रहबर तेरा  .. ऐ परिन्दे, बोल आख़िर कौन है रहबर तेरा

शुभ-शुभ

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 16, 2013 at 3:08pm

उम्दा ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई ...सादर 

Comment by Saarthi Baidyanath on November 15, 2013 at 10:22pm

बहुत बढ़िया कटाक्ष 

उस तरफ मख़मल पे सोता है हर इक नौकर तेरा....वाह 

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on November 15, 2013 at 10:10pm

अंजामे मौत से डरता कौन है ?

मेरी बाजु से मुझे ये डसता  कौन है ?

बहुत  फ़रमाया है आपने अंजाम तो सोचना ही पड़ेगा 

सार्थक रचना 

बहुत बहुत बधाई 

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on November 15, 2013 at 8:35pm
बहुत उम्दाभावों ने प्रभावित किया
Comment by Meena Pathak on November 15, 2013 at 5:36pm


सोच दिल पे हाथ रखकर ऐ वतन के नौजवां 
हादसों के बाद क्यों आता है नाम अक्सर तेरा................. बहुत खूब | बधाई आप को 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 15, 2013 at 9:10am

बेहतरीन ग़ज़ल बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
11 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
yesterday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service