For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मॉं :::अखंड गहमरी

मॉं

एक शब्‍द

एक संबोधन

एक रिश्‍ता

क्‍या हैं,मॉं

नहीं समझ पाया

नहीं जान पाया

नीमअंधकार से निकला मैं

खुली पलकें

मखमली गोद में

सिर पर स्‍नेह की छाया

सीने से लग कर

क्षुधार्त की शांति

क्‍या यही हैं मॉं

या मॉं हैं

हाड़ मॉंस की एक पुतली

जिसके अनेकों रूप

जाने अंजाने कितने

बेटी,बहन,बहू पत्‍नी

आसानी से बनते रिश्‍ते

मगर मॉं

दिर्घावधि तक

वेदना,पीड़ा,कष्‍ट

सह कर

एक सुख की आशा ,

तोतले जुबान से

म, म, मा ,मॉं

सुनने की आशा

जीवन की निराशा से

उभरने की आशा

शायद अखंड

यही है मॉं

त्‍याग,बलिदान,कर्तव्‍य

और नेह की एक रमणी

मौलिक व अप्रकाशित अखंड गहमरी की प्रस्‍तुति

 

Views: 426

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 19, 2013 at 10:22am

सच! माँ तो माँ ही होती है, अति सुंदर भाव लिए हुयी रचना पर बधाई स्वीकारें आदरणीय अखंड जी

Comment by विजय मिश्र on November 18, 2013 at 4:54pm
अतिसुन्दर संप्रेषण ,बधाई
Comment by Akhand Gahmari on November 18, 2013 at 9:46am

आदरणीये पाठक जी आप जो कहना चाहते है स्‍वतंन्‍त्र रूप से कहीये आप के विचारो का स्‍वागत है। एवं सभी आदरणीय के विचारो का स्‍वागत है जैसे की कई चीजों को आदरणीये गोपाल श्रीवास्‍तव जी ने बताया उसके अनुसार मैं परिवर्तन लाने का प्रयास करता हूँ, आप के केवल यह कह देना कि मैं कुछ नहीं कहुगॉं उचित नहीं होगा आपका अखंड गहमरी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 18, 2013 at 9:37am

सुन्दर रचना के लिए बधाई. आदरणीय अखंड जी, कुछ शब्द विशिष्ट सन्दर्भों में ही प्रयुक्त होते हैं, आदरणीय गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी ने संकेत कर ही दिया है. जैसे जुल्फ  का अर्थ केश राशि है , इसका प्रयोग प्रेयसी के लिए किया जाता है, बिटिया के लिए नहीं.  सादर..........

Comment by ram shiromani pathak on November 17, 2013 at 11:27pm

आदरणीय  भाई  जी  आपकी  रचना  माँ  शब्द  से  प्रारम्भ  है  अतः  ज्यादा   कुछ  नहीं  कहूंगा   …रचन  पोस्ट  करने  के  पहले चार  पाँच  बार ज़रूर पढ़  लिया  करे…… सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 17, 2013 at 8:23pm

आदरणीय अखण्ड भाई , माँ तो बस माँ ही हो सकती है !!! माँ की महिमा गाती आपकी रचना के लिये आपको हार्दिक बधाई !!!!

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 17, 2013 at 7:22pm

वाह अखंड जी

शायद अखंड  यही है माँ

 त्याग बलिदान कर्त्तव्य

 और नेह की एक रमणी     बस इतना अनुरोध है की जब जिक्र माँ का हो तो रमणी  शब्द से परहेज करें  i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
23 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
23 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service