For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"क्या? आपने धूम्रपान छोड़ दिया? ये तो आपने कमाल ही कर दिया।"
"आखिर इतनी पुरानी आदत को एकदम से छोड़ देना कोई मामूली बात तो नहीं।"
"सही कहा आपने, ये तो कभी सिगरेट बुझने ही नही देते थे।"
"जो भी है, इनकी दृढ इच्छा शक्ति की दाद देनी होगी।"
"इस आदत को छुड़वाने का श्रेय आखिर किस को जाता है?"
"भाभी को?"  
"गुरु जी को?"
"नहीं, मेरी रिटायरमेंट को।"उसने ठंडी सांस लेते हुए उत्तर दिया।
.
.
(मौलिक व अप्रकाशित) 

Views: 1970

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on December 6, 2013 at 10:32pm

आदरणीय बागी जी, मेरे विचार से आदरणीय योगराज जी की योग्यता या इस लघुकथा की गुणवत्ता पर प्रश्न-चिन्ह लगाना उद्देश्य नहीं है!

चूँकि इस मंच पर लघुकथा पर बहुत काम हो रहा है इसलिए इस विधा पर एक लेख आवश्यक है!

यदि आदरणीय योगराज जी ही इस पर कुछ लिखें तो उत्तम रहेगा! हम लोगों को भी इस विधा की जानकारी प्राप्त हो सकेगी!

सादर! 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 6, 2013 at 9:39pm

बृजेश भाई अब तो मैं आदरणीय राहुल देव जी से ही आशान्वित हूँ कि वो लघुकथा पर एक लेख प्रस्तुत करें, क्योंकि मैं जिन्हे अब तक लघुकथा का भीष्म पितामह मानता रहा हूँ और उनकी लघुकथाएं पढ़ पढ़ कर सीखता रहा हूँ उनकी एक बेहतरीन लघुकथा को आदरणीय ने एक सिरे से नकार दिया है |

आदरणीय योगराज सर आपकी लघुकथा पर टिप्प्णी हेतु देर से आना हो रहा है किन्तु रचना पोस्ट होते ही मैंने पढ़ ली थी, और सच कहूं तो एक ईर्ष्या सी हुई कि यह मैंने क्यों नहीं लिखी | इस लघुकथा को पढ़ने के दौरान सेकंड लास्ट लाइन तक कुछ नहीं समझ सका किन्तु अंतिम वाक्य जैसे उठा कर किसी ने पटक दिया, छन् से एक झटके में तन्द्राविहीन हो गया | आज तक पढ़ी लघुकथाओं में यदि ५ बेहतरीन लघुकथा अलग करनी हो तो यह लघुकथा उनमे एक होगी |

बहुत बहुत बधाई आदरणीय गुरुदेव | 

Comment by बृजेश नीरज on December 6, 2013 at 7:25pm

लघुकथा विधा को लेकर आदरणीय राहुल जी ने बहुत ही अच्छे बिंदु उठाये हैं! लघुकथा पर एक लेख इस मंच पर अवश्य होना चाहिए जिससे इसके शिल्प व अन्यान्य बिन्दुओं पर चर्चा संभव हो सके!

सादर!


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 6, 2013 at 10:09am

दिल से आभार भाई शुभ्रांशु जी.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 6, 2013 at 10:09am

भाई राहुल देव जी, आपकी बेबाक राय जान अच्छा लगा, और मैं उसका सम्मान भी करता हूँ। लेकिन मेरे भाई, लघुकथा इस तरह भी लिखी जाती है - आश्वस्त रहें।

Comment by Shubhranshu Pandey on December 5, 2013 at 1:54pm

आदरणीय योगराज जी, 

आवकाश प्राप्ति के बाद वेतन से एक या दो छल्ले कम होते हैं, लेकिन गये हुये छल्ले अपने साथ श्वेतधूम्र दण्डिका के गोल्डेन कश भी साथ ले जाते हैं.

सार्थक सुन्दर कथा.

सादर.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 4, 2013 at 12:31pm

दरअसल मैं खुद अभी इस दौर से बहुत साल दूर हूँ. लकिन इस प्रकार के हालातों से कई दफा दो चार होना ही पड़ जाता है. आपने बिलकुल सत्य कहा कि ज़िम्मेवारियों का बोझ ऐसे हालत पैदा कर ही दिया करता है. आपको लघुकथा पसंद आई यह जान कर बहुत अच्छा लगा, दिल से शुक्रिया भाई अरुण शर्मा अनंत जी.

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 4, 2013 at 12:18pm

आदरणीय श्री योगराज सर अभी मैं उस दौर से गुजरा तो नहीं हूँ किन्तु पढ़कर ऐसा लगा मानो मैं स्वयं भी इस दौर से गुजर रहा हूँ शायद इसलिए कि जिम्मेदारियां काँधे पर चढ़कर बैठी हुई हैं. सादर नमन आपकी लेखनी को आपको प्रणाम इतनी सुन्दर लघुकथा हेतु.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 4, 2013 at 10:25am

दिल से शुक्रिया भाई शिज्जू शकूर जी.     


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 4, 2013 at 10:24am

लघुकथा पर आपकी उत्साहवर्धक टिप्प्णी से मेरा हौसला दोबाला हुआ है आ० लक्ष्मण प्रसाद लड़ीवाला जी,सादर आभार।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहा छंद ++++++++++++ वार्ता निष्फल  शांति की, जारी है फिर युद्ध। कमी तेल औ’ गैस की,…"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम् "
17 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय विजय निकोर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
yesterday
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Wednesday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Apr 11
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service