For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सीएफ़एल बोली, "हे बल्ब महोदय! आप ऊर्जा बहुत ज्यादा खर्च करते हैं और रोशनी बहुत कम देते हैं। मैं आपकी तुलना में बहुत कम ऊर्जा खर्च करके आपसे कई गुना ज्यादा रोशनी दे सकती हूँ।"

 

बल्ब महोदय ने चुपचाप सीएफ़एल के लिए कुर्सी खाली कर दी। रोशनी फैलाने वालों के इतिहास में बल्ब महोदय का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा गया।

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 952

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on January 7, 2014 at 10:21pm

SANDEEP KUMAR PATEL जी, coontee mukerji जी, Dr Ashutosh Mishra जी, अरुन शर्मा 'अनन्त' जी, Meena Pathak जी, Shubhranshu Pandey जी, जितेन्द्र 'गीत' जी, Dr.Prachi Singh जी एवं सौरभ जी आप सबको यह लघुकथा पसंद आई और आपने मेरा हौसला बढ़ाया इसके लिए तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हुँ। स्नेह बना रहे।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 18, 2013 at 11:34pm

आदरणीय धर्मेन्द्रजी,  लघुकथा ’बल्ब और सीएफ़एल’ पर खेद है विलम्ब से आ पारहा हूँ.

य़ह एक ऐसे उटोपियन समाज का स्वप्न दिखाती है जहाँ सरसतापूर्वक दायित्व का हस्तांतरण होता है. प्रबुद्ध परिवारों का यही चलन उन परिवारों के ऐतिहासिक संस्कार का कारण हुआ करता है. लेकिन शासन-सत्ता और राजनैतिक माहौल में ऐसे संस्कार का न होना वर्ग, विचार और पीढ़ियों में संघर्ष का कारण रहा है.


इस उन्नत लघुकथा के इंगितों के लिए हृदय से बधाई.
सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 10, 2013 at 7:45pm

बल्ब महोदय का सी ऍफ़ एल के लिए कुर्सी खाली कर देना.............वाह बहुत सुन्दर बिम्ब के माध्यम से सधी हुई संदेशपरक और सफल लघुकथा के लिए हार्दिक शुभकामनाएं आ० धर्मेन्द्र कुमार जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 10, 2013 at 11:05am

परिवर्तन संसार का नियम है, आपकी लघुकथा पढ़कर मन में विचार आया कि अगर देश में चुनाव  होते है, जिसका पूरा खर्च जनता के कन्धों पर आता है, अगर इस से  प्रकार नेताओं को बदला जा सके तो,, खैर बहुत बढ़िया सन्देश देती लघुकथा पर बधाई स्वीकारें आदरणीय धर्मेन्द्र जी

Comment by Shubhranshu Pandey on December 9, 2013 at 7:20pm

आदरणीय धर्मेन्द्र जी, अभी सीएफ़एल है, फ़िर एल् ई डी लाइट आ कर इसे भी इतिहास के पन्नों पर लटका देगी.

मान मनौवल हो तब तक, आवश्यकता हो जब तक...उसके बाद इतिहास के क्लिप फ़ाइल में एक और पन्ना....

सुन्दर कथा. 

सादर.

Comment by Meena Pathak on December 9, 2013 at 2:32pm

बहुत सुन्दर, संदेशपरक लघुकथा हेतु बधाई स्वीकारें 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 9, 2013 at 1:48pm

लधुकथा के माध्यम से सुन्दर सन्देश दिया है आपने आदरणीय बधाई आपको

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 9, 2013 at 1:06pm

आदरणीय धर्मेन्द्र जी ,, इस बेहतरीन लघु कथा के लिए तहे दिल बधाई स्वीकार करें ...सादर 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on December 8, 2013 at 9:29pm

आदरणीय  योगराज जी,  आपके इस स्नेह और मार्गदर्शन के लिये तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ। आप जैसे वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन नये रचनाकारों को वाचाल होने से बचा लेता है। आपसे सहमत हूँ और आखिरी पंक्ति हटा रहा हूँ ।


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 8, 2013 at 6:01pm

बिलकुल नवीन और विलक्षण बिम्बों से सुसज्जित आपकी यह लघुकथा  प्रभावशाली हुई है आ० धर्मेन्द्र सिंह जी, जिसके लिए हार्दिक बधाई निवेदित है. लघुकथा की अंतिम पंक्ति हालाकि गैर ज़रूरी और बदमज़गी पैदा कर रही है.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
14 minutes ago
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
yesterday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service