For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जब याद तेरी तडपाये
रातों को नींद न आये

कोई दर्द समझ न पाए
आने वाले अब तो आजा

सावन बीता जाए
जब याद तेरी तडपाये

बचपन में साथ जो खेले
सब दुःख सुख मिलकर झेले

हम रह गए आज अकेले
jab से वोह परदेस गए हैं

लौट कर फिर न आये
जब तेरी याद तडपाये

जब फैली तेरी खुशबू
सूखे आँखों में आंसू

है तुझमे ऐसा जादू
मिटटी को अगर हाथ लगा दे

तो सोना बन जाए
जब याद तेरी तडपाये

बरसे तेरी ज़ुल्फ़ के बादल
दिल हो गया मेरा पागल

यूँ ढूँढू तेरा आँचल
जैसे कोई प्रेमी पानी खो जाए

जब तेरी याद तडपाये
रातों को नींद न आये

Views: 445

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 8, 2010 at 4:13pm
Bahut sunder Aleem sahib.
Comment by asha pandey ojha on June 7, 2010 at 12:40pm
बचपन में साथ जो खेले
सब दुःख सुख मिलकर झेले

हम रह गए आज अकेले
jab से वोह परदेस गए हैंbahut sundar
Comment by Rash Bihari Ravi on June 3, 2010 at 3:03pm
bahut badhia
Comment by Kanchan Pandey on June 1, 2010 at 2:16pm
बचपन में साथ जो खेले
सब दुःख सुख मिलकर झेले

हम रह गए आज अकेले
jab से वोह परदेस गए हैं

Bahut badhiya aleem jee, achha likhey hai,
Comment by satish mapatpuri on May 31, 2010 at 2:25pm
बरसे तेरी ज़ुल्फ़ के बादल
दिल हो गया मेरा पागल

यूँ ढूँढू तेरा आँचल
जैसे कोई प्रेमी पानी खो जाए
बड़ा ही हसीन ख्याल और दिलकश अंदाज़ है अलीम साहेब, शुक्रिया.
Comment by Admin on May 30, 2010 at 9:41am
जब याद तेरी तडपाये
रातों को नींद न आये

कोई दर्द समझ न पाए
आने वाले अब तो आजा

वाह अलीम साहब वाह , बढ़िया लिखे है, बिरह वेदना को बहुत सुन्दरता के साथ अभिव्यक्त किया है आपने, धन्यवाद,
Comment by Biresh kumar on May 30, 2010 at 7:09am
जब फैली तेरी खुशबू
सूखे आँखों में आंसू
subhaanallah!!!!!!!!!!!!!!!

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 29, 2010 at 9:36pm
जय हो अलीम भाई , बहुत बढ़िया रचना लाये है, प्रीतम भाई ठीक कहते है, की ये सिलसिला अब रुकना नही चाहिये , धन्यबाद ,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 29, 2010 at 9:12pm
जब याद तेरी तडपाये
रातों को नींद न आये

कोई दर्द समझ न पाए
आने वाले अब तो आजा
waah aleem bhai waah.....ek aur dhamakedaar rachna......main dheere dheere aapka fan banta jaa raha hoon...
bahut accha likh rahe hian bhai...aapse ab yahi aagrah hai ki ye silsila kabhi roke nahin..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
13 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
13 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
14 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
15 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service