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तुम्हारी मुस्कुराहट को गजल हमने बनाया है

मोहब्बत में तुम्हारा ही लबों पर नाम आया है,
भ्रमर की गुनगुनाहट का कली पर रंग आया है।
यहां हर बज्म तेरे नाम से गुलजार होती है,
तुम्हारी मुस्कुराहट को गजल हमने बनाया है।।

---------------------------------

दिवाली लब से बोलो तो अली का नाम आता है
जनम भर सिर झुकाने का सलीका काम आता है,
मुल्क में धर्म को लेकर उपद्रव पालने वालों
लिखो और ​फिर पढो रमजान में भी राम आता है।।

---------------------------------------

कली जब फूल बन जाए, भ्रमर तब गुनगुनाएगा,
ये गुलशन में मोहब्बत से भरे नगमे सुनाएगा।
हमने झील समझा था, मगर तुम तो नदी निकली
तुम्हारी प्यास तो कोई समंदर ही बुझाएगा।।

नोट— रचनाएं मौलिक व अप्रकाशित हैं।

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Comment by savitamishra on January 9, 2014 at 11:01am

बहुत सुंदर

Comment by atul kushwah on December 20, 2013 at 4:52pm

आदरणीय सर, प्रयास करूंगा। सादर— अतुल

Comment by atul kushwah on December 20, 2013 at 4:51pm

आदरणीय सौरभ सर, आपका मार्गदर्शन इस अबोध प्रयास के लिए महत्वपूर्ण है।  सादर— अतुल


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 20, 2013 at 12:13am

आपक इस मंच पर स्वागत है अतुलभाई. मैं संभवतः आपकी कोई पहली रचना ही पढ़ रहा हूँ. रचनाकर्म के क्रम में सार्थक अनुभूतियों और भाव की गहनता को प्रश्रय दें.

शुभ-शुभ

Comment by atul kushwah on December 16, 2013 at 5:41pm

गिरिराज जी, अबोध प्रयास को सराहने के लिए बहुत सारा धन्यवाद। सादर— अतुल


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 16, 2013 at 5:26pm

आदरणीय अतुल भाई , सुन्दर चतुस्पदियों के लिये आपको बधाइयाँ !!!!

कृपया ध्यान दे...

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