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कुछ ऐसे पुकारा तुमने (अन्नपूर्णा बाजपेई)

कुछ इस तरह पुकारा तुमने

कदम भी मेरे लगे बहकने 

कुछ इस .........

दामिनी दमक उठी नैनो मे

सरगम छनक उठी साँसों मे

हृद वीणा सी  झंकृत कर दी

जागे से लगने लगे सपने 

कुछ .......................

अन्तर्भावों की सुरवलियों मे

उद्गारों की हारावलियों मे

शब्द सुशोभित सज्जित कर दी

मन-कानन सब लगे महकने 

कुछ .....................

अप्रकाशित एवं मौलिक

 (संशोधित रचना)

 

Views: 751

Comment

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Comment by vijay nikore on December 24, 2013 at 7:19pm

अति सुन्दर, कोमल भाव। बधाई।

Comment by annapurna bajpai on December 24, 2013 at 5:27pm

आ0 वैद्य नाथ जी , आ0 आशीष जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on December 23, 2013 at 11:23pm

प्रेम की सुन्दर अभिव्यक्ति |
बढ़िया रचना पर हार्दिक बधाइयाँ आदरणीया अन्नपूर्णा जी !

Comment by Saarthi Baidyanath on December 23, 2013 at 6:40pm

शब्दों की सज्जा ..बढ़िया लगी !...सुन्दर रचना :)

Comment by annapurna bajpai on December 23, 2013 at 6:09pm

आदरणीय जितेंद्र जी , अविनाश जी , आ0 भण्डारी जी , मीना जी , श्याम नारायण जी अप सभी का हार्दिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on December 23, 2013 at 6:06pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायण जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by Shyam Narain Verma on December 23, 2013 at 4:39pm
बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर रचना के लिए ……………..

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 23, 2013 at 4:07pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी , बहुत सुन्दर रचना ॥ आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

Comment by Meena Pathak on December 23, 2013 at 11:41am

अन्तर्मन की कुसुमावलियों मे

उद्गारों की हारावलियों मे

शब्द सुशोभित सज्जित कर दी

कुछ ऐसे .......................सुन्दर मनभावन गीत ,, बधाई आप को आ० अन्नपूर्णा जी | सादर 

Comment by AVINASH S BAGDE on December 23, 2013 at 11:39am

अन्तर्मन की कुसुमावलियों मे

उद्गारों की हारावलियों मे अभिव्यक्त होती अन्नपूर्णा जी की  बात 

कृपया ध्यान दे...

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