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खुदा तुम्हारे ही खो जाने में मिलता है

जो पीने को दिल के पैमाने में मिलता है ।

वो जाम मोहब्बत के मैखाने में मिलता है ।

ना होश न खबर कोई मस्ती है खुमारी है ,

ये इल्म फकीरों के अफ़साने में मिलता है ।

सब झूठ ही कहते हैं कि शम्मा जलती है ,

जलने का हुनर फकत परवाने में मिलता है ।

कुछ मज़ा दीवाने को आता है तड़पने में ,

कुछ लुत्फ़ उन्हें भी तो तड़पाने में मिलता है ।

ये समझ ले जो तूने दिल में ही नही पाया ,
वो मन्दिर मस्जिद ना बुतखाने में मिलता है ।

जिसे खोज खोज कर तुम कभी खोज नही पाये ,

वो खुदा तुम्हारे ही खो जाने में मिलता है ।

मौलिक व अप्रकाशित

नीरज 'प्रेम'

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Comment by MAHIMA SHREE on January 7, 2014 at 7:39pm

ना होश न खबर कोई मस्ती है खुमारी है ,

ये इल्म फकीरों के अफ़साने में मिलता है ।

 

जिसे खोज खोज कर तुम कभी खोज नही पाये ,

वो खुदा तुम्हारे ही खो जाने में मिलता है...... वाह  उम्दा हार्दिक बधाई आपको /

 

 

Comment by mohinichordia on January 7, 2014 at 2:17pm

नीरज जी आपकी गज़ल की अन्तिम चार पंक्तियाँ दिल को भा गईं |  |वो खुदा तुम्हारे खो जाने में ही मिलता हे | बहुत सुन्दर लिखा \

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 7, 2014 at 6:49am

आदरणीय नीरज ' प्रेम ' भाई , बहुत सुन्दर , सच्ची और अच्छी भावाभिव्यक्ति है. बहुत बधाइयाँ .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 6, 2014 at 7:47pm

अच्छी भावाभिव्यक्ति है नीरज जी बहुत बढ़िया प्रयास है शुभकामनायें

Comment by coontee mukerji on January 6, 2014 at 5:34pm

जिसे खोज खोज कर तुम कभी खोज नही पाये ,

वो खुदा तुम्हारे ही खो जाने में मिलता है ।......बहुत खूब.  बधाई आपको नीरज भाई. सादर

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 6, 2014 at 5:12pm

आदरणीय नीरज ' प्रेम ' भाई , बहुत सुन्दर,,शानदार,,,क्या बात है,,,बधाई आपको,,,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 6, 2014 at 7:48am

आदरणीय नीरज ' प्रेम ' भाई , बहुत सुन्दर , सच्ची आध्यात्मिक बातें कही है ,  आपको बहुत बधाइयाँ ॥

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