For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खुदा तुम्हारे ही खो जाने में मिलता है

जो पीने को दिल के पैमाने में मिलता है ।

वो जाम मोहब्बत के मैखाने में मिलता है ।

ना होश न खबर कोई मस्ती है खुमारी है ,

ये इल्म फकीरों के अफ़साने में मिलता है ।

सब झूठ ही कहते हैं कि शम्मा जलती है ,

जलने का हुनर फकत परवाने में मिलता है ।

कुछ मज़ा दीवाने को आता है तड़पने में ,

कुछ लुत्फ़ उन्हें भी तो तड़पाने में मिलता है ।

ये समझ ले जो तूने दिल में ही नही पाया ,
वो मन्दिर मस्जिद ना बुतखाने में मिलता है ।

जिसे खोज खोज कर तुम कभी खोज नही पाये ,

वो खुदा तुम्हारे ही खो जाने में मिलता है ।

मौलिक व अप्रकाशित

नीरज 'प्रेम'

Views: 494

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by MAHIMA SHREE on January 7, 2014 at 7:39pm

ना होश न खबर कोई मस्ती है खुमारी है ,

ये इल्म फकीरों के अफ़साने में मिलता है ।

 

जिसे खोज खोज कर तुम कभी खोज नही पाये ,

वो खुदा तुम्हारे ही खो जाने में मिलता है...... वाह  उम्दा हार्दिक बधाई आपको /

 

 

Comment by mohinichordia on January 7, 2014 at 2:17pm

नीरज जी आपकी गज़ल की अन्तिम चार पंक्तियाँ दिल को भा गईं |  |वो खुदा तुम्हारे खो जाने में ही मिलता हे | बहुत सुन्दर लिखा \

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 7, 2014 at 6:49am

आदरणीय नीरज ' प्रेम ' भाई , बहुत सुन्दर , सच्ची और अच्छी भावाभिव्यक्ति है. बहुत बधाइयाँ .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 6, 2014 at 7:47pm

अच्छी भावाभिव्यक्ति है नीरज जी बहुत बढ़िया प्रयास है शुभकामनायें

Comment by coontee mukerji on January 6, 2014 at 5:34pm

जिसे खोज खोज कर तुम कभी खोज नही पाये ,

वो खुदा तुम्हारे ही खो जाने में मिलता है ।......बहुत खूब.  बधाई आपको नीरज भाई. सादर

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 6, 2014 at 5:12pm

आदरणीय नीरज ' प्रेम ' भाई , बहुत सुन्दर,,शानदार,,,क्या बात है,,,बधाई आपको,,,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 6, 2014 at 7:48am

आदरणीय नीरज ' प्रेम ' भाई , बहुत सुन्दर , सच्ची आध्यात्मिक बातें कही है ,  आपको बहुत बधाइयाँ ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
2 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
16 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service