For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

घनाक्षरी छंद - मन हरण

गीत भी लिखे कलम भारती के गान के तो,
कागज भी नाच के ही आन करने लगा

वंदन हजार माँ को छंद ने किये है और 
पंक्ति पंक्ति लिख के ही गान करने लगा 

स्याही शूर वीरता के मंत्र लिखती गयी तो  
अक्षर भी अक्षर का मान करने लगा 

देशप्रेम वाला भाव मन में बसा लिया तो   
शब्द शब्द राष्ट्र को सलाम करने लगा 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

आशीष ( सागर सुमन)  

Views: 647

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by ram shiromani pathak on January 14, 2014 at 9:26pm

इस सुन्दर प्रयास हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें////सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2014 at 4:19pm

अरुन अनन्त जी, आपने किस तथ्य को साझा किया कि घनाक्षरी में तुकान्तता अनिवार्य नहीं है. कृपया साझा करें तो हम सभी को लाभ होगा.

आदरणीय आशीष भाईजी, आपकी घनाक्षरी कथ्य की दृष्टि से भी तनिक और प्रयास मांगती है.  इस प्रस्तुति पर चूँकि आपसे मेरा व्यक्तिगत संवाद बन चुका है अतः आपसे उचित की अपेक्षा है.

सादर

Comment by रमेश कुमार चौहान on January 10, 2014 at 10:40pm
सुंदर भाव एवं सुंदर छंद
Comment by Ashish Srivastava on January 9, 2014 at 9:58pm

annapurna bajpai  जी आप ने रचना पढ़कर उत्साह बढाया , आभार अनुपमा जी 

Comment by Ashish Srivastava on January 9, 2014 at 9:58pm

अरुन शर्मा 'अनन्त': जी आप ने रचना पढ़कर उत्साह बढाया , आभार मान्यवर  और आपका सुझाव अत्यंत प्रिय है , पुनः आभार ह्रदय से 

Comment by Ashish Srivastava on January 9, 2014 at 9:58pm

Shyam Narain Verma जी आप ने रचना पढ़कर उत्साह बढाया , आभार मान्यवर  और आपका सुझाव अत्यंत प्रिय है , पुनः आभार ह्रदय से 

Comment by Ashish Srivastava on January 9, 2014 at 9:57pm

गिरिराज भंडारी:  आप ने रचना पढ़कर उत्साह बढाया , आभार मान्यवर 

Comment by annapurna bajpai on January 9, 2014 at 6:52pm

आ0 आशीष जी सुंदर घनाक्षरी छंद हुआ है आपको बधाई । 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 9, 2014 at 3:07pm

भाई आशीष जी बहुत सुन्दर प्रयास हुआ है घनाक्षरी छंद पर. भाई जी इस छंद में भाषा का प्रवाह और गति सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है. तुकांतता आवश्यक नहीं किन्तु ऐसा करने से पढ़ने और सुनने वालों को अधिक मधुर लगता है. विधान के हिसाब से बिलकुल सही है. इस सुन्दर प्रयास हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by Shyam Narain Verma on January 9, 2014 at 12:10pm

आदरणीय ,
कवित्त में लय ही मुख्य है | सम प्रयोग बहुत कर्ण मधुर होते हैं |

बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर रचना के लिए ……………..

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
12 hours ago
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
yesterday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service