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किसको पता कि कौन हूँ मैं ....

कोई शब्द नहीं निःशब्द हूँ मैं ....

खुद के चित्कार में छुप जाता हूँ

मेरा अस्तित्व,

मेरी संवेदनाएं

सन्नाटों ने खूब पढ़ा है

मेरे अनकहे शब्दों को

और ठंडी चुभती सर्द हवाओं ने

महसूस करा है ....

मेरे शब्दों के एहसास को .....

बहुत कुछ कहता हूँ

दिन भर .... 

तुमसे, सबसे

पर सच कहूँ तो 

आज तक

मैं, सिर्फ निःशब्द हूँ .....

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 826

Comment

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Comment by Amod Kumar Srivastava on February 8, 2014 at 8:43pm

बहुत बहुत आभार आ0 अलीन जी .... 

Comment by Amod Kumar Srivastava on February 8, 2014 at 8:43pm

धन्यवाद आ0 मीना पाठक जी ... 

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 5, 2014 at 9:43am

बस एक शब्द....................लाजवाब................

Comment by Meena Pathak on January 28, 2014 at 12:54pm

 सच कहूँ तो 

आज तक

मैं, सिर्फ निःशब्द हूँ .........................बहुत सुन्दर रचना .. बधाई आप को आ० अमोद जी 

Comment by Amod Kumar Srivastava on January 24, 2014 at 8:17pm

आ0 सविता मिश्रा जी, आ0 नादिर खान जी, आ0 अनन्त जी, भाई पाठक जी, आ0 सौरभ जी, आ0 कल्पना रामानी जी, आ0 अन्नपूर्णा जी बहुत बहुत आभार..... 

Comment by annapurna bajpai on January 16, 2014 at 5:58pm

    sundarसुंदर रचना बहुत बधाई आपको । 

Comment by कल्पना रामानी on January 15, 2014 at 3:04pm

सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय आमोद जी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2014 at 11:25pm

बहुत कुछ खौल रहा है .. बाहर आने दें..

शुभेच्छाएँ

Comment by ram shiromani pathak on January 14, 2014 at 9:44pm

 सुन्दर रचना .. बधाई आपको | सादर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 13, 2014 at 11:08am

अच्छी रचना है आदरणीय बधाई स्वीकारें.

कृपया ध्यान दे...

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