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मुहब्बतों के पैगाम ..........

मुहब्बतों के पैगाम .....

ये मुहब्बत भी
अजब शै है ज़माने में
उम्र गुज़र जाती है
समझने और समझाने में
कब हो जाती हैं सांसें चोरी
खबर ही नहीं होती
बरसों नहीं आती नींद
उनके इक बार मुस्कुराने में
डूबे रहते हैं पहरों
इक दूसरे के ख्यालों में
जाने गुज़र जाती शब् कैसे
इक दूसरे से बतियाने में
शब् जाती है तो
सहर आ जाती है
सहर क्या आती है
संग कहर ले आती है
वो लम्हे अंगार बन जाते है
जो संग शब् के गुज़र जाते हैं
राहे मुहब्बत में
कुछ ऐसे भी मुकाम आते हैं
जब दो जिस्म इक जान हो जाते हैं
इक दूसरे में फना
हर सांस हो जाती है
मख़मली अहसासों में
न हस्ती होती है
न नाम होते हैं
थरथराते लबों पे बस
मुहब्बतों के पैगाम होते हैं

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 635

Comment

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Comment by Sushil Sarna on January 21, 2014 at 1:42pm

aa.Rahul Dev jee rachna par aapkee madhur pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on January 21, 2014 at 1:42pm

aa.Coontee Mukerji jee rachna par aapkee madhur pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on January 21, 2014 at 1:41pm

aa.Ajay Sharma jee rachna par aapkee madhur pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on January 21, 2014 at 1:41pm

aa.Giriraj Bhandaaree jee rachna par aapkee snehil prashansa ka haardik aabhaar

Comment by coontee mukerji on January 21, 2014 at 1:27am


हर सांस हो जाती है
मख़मली अहसासों में
न हस्ती होती है
न नाम होते हैं
थरथराते लबों पे बस
मुहब्बतों के पैगाम होते हैं.....बहुत खूब

Comment by ajay sharma on January 20, 2014 at 11:15pm

मख़मली अहसासों में 
न हस्ती होती है 
न नाम होते हैं 
थरथराते लबों पे बस 
मुहब्बतों के पैगाम होते हैं

bahut khoob 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 20, 2014 at 10:24pm

आदरणीय सुशील भाई , प्रेम की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति हुई है , आपको हार्दिक बधाई ॥

कृपया ध्यान दे...

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